टिहरी झील साहसिक पर्यटन महोत्सव की आखिरी शाम प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी और स्थानीय कलाकारों के नाम रही। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए सांस्कृतिक दलों ने सुमधुर गीत, नृत्य प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
रविवार देरशाम बौराड़ी स्टेडियम में विभिन्न सांस्कृतिक दलों के कार्यक्रम हुए। सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन पर्यटन मंत्री दिनेश धनै, डीएम इंदुधर बौड़ाई ने संयुक्त रूप से किया। काबीना मंत्री धनै ने कहा कि पर्यटन महोत्सव का उद्देश्य टिहरी झील में साहसिक खेलों को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में गतिविधियों में देसी-विदेशी सैलानियों की आमद बढ़ेगी।
लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने जय शंकर जय जय शिव शंकर स्तुति से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत की। उन्होंने टिहरी डूबण लग्यूं च बेटा डाम का खातिर, तू दिख्यांदी जनि जुन्याली, तितरी फंसे चखुली फंसे, नया जमाना का छोरों कनि उठि बौल, मालू ग्वीरालू का बीच, ज्यूड़ी माया कि...आदि शृंखलाबद्ध प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। लोक गायिका अनुराधा निराला ने मुलमुल केकू हैंसणी छैं तू गीत प्रस्तुत किया।
इस दौरान गायक अनिल बिष्ट, परमेंद्र नेगी आदि ने भी प्रस्तुतियां दी। हास्य कलाकार किसना बगोट ने हास्य प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को लोटपोट किया। इस मौके पर गणेश खुगशाल गणी, फारुख सेख, सीडीओ आशीष भटगाईं, एसडीएम चतर सिंह चौहान, उप निदेशक पर्यटन पूनम चंद, मुरारी लाल खंडवाल, मनवीर नेगी, यतवीर चौहान, सत्ती जोशी, देवेंद्र दुमोगा, सतीश उनियाल, बलवीर नेगी आदि मौजूद थे।
उधर, इससे सुरगंगा संगीत विद्यालय के सांस्कृतिक दल के अलावा पूर्व गायिका बीना बोरा ने सात हमरु छुटू न, सुण मेरा मायादार आदि गीत प्रस्तुत किए, कार्यक्रम में रेनू बाला, मीना नौटियाल, पदम गुसाईं, रवि गुसाईं ने भी प्रस्तुतियां दी।