मार्च 2021 तक जमा आवेदन पत्रों पर ही मानकानुसार विचार किया जाएगा
नई टिहरी। प्रदेश सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के लिए लंबित आवेदन पत्रों का निस्तारण करने के लिए आंदोलनकारियों को एक और मौका दिया है। इसमें उन्हीं आवेदन पत्रों पर विचार किया जाएगा जिसके आवेदन पत्र वर्ष 2021 तक जिला प्रशासन के पास जमा है। राज्य आंदोलनकारी घोषित करवाने के लिए आवेदक को पूर्व निर्धारित सभी मानक पूरे करने होंगे। आवेदन पत्रों का निस्तारण करने के लिए छह माह की समय सीमा तय की गई है।
पृथक उत्तराखंड राज्य गठन के बाद राज्य आंदोलन में विशेष भूमिका निभाने वालों को प्रदेश सरकार की ओर से राज्य आंदोलनकारी का दर्जा देकर उन्हें कई सुविधाएं प्रदान की जा रही है लेकिन अभी तक दर्जनों आवेदन पत्र प्रशासन के पास लंबित हैं, जिनका निस्तारण होना बाकी है। सरकार ने ऐसे लंबित आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए एक बार फिर से छह माह की समय सीमा तय कर आवेदकों को मौका दिया है। हालांकि इस बार भी आवेदक को दिसंबर 2017 में निर्धारित सभी मानकों को पूरा करना होगा।
राज्य आंदोलनकारी घोषित होने के लिए आवेदक को प्रदेश सरकार की ओर से तय किए गए मानकों में स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) रिपोर्ट, पुलिस के अभिलेखों में डेली डायरी की रिपोर्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) और चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट आदि दस्तावेज समिति के सम्मुख प्रस्तुत करने होंगे।
इसमें उन्हीं आवेदन पत्रों पर विचार किया जाएगा, जिनके आवेदन पत्र पहले से ही जिला प्रशासन के पास लंबित हैं। राज्य आंदोलनकारी मंच के कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी चिह्नीकरण से अभी कई लोग छूटे हुए हैं। जिला प्रशासन के पास करीब 150 से अधिक आवेदन पत्र लंबित हैं। नए आवेदकों को भी मौका दिया जाना चाहिए।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी चिह्नीकरण की तिथि शासन स्तर से छह माह तक विस्तारित की गई है। इसमें उन्हीं आवेदन पत्रों पर विचार किया जाएगा। जिनके आवेदन पत्र मार्च 2021 तक जमा हैं।
- नितिका खंडेलवाल, डीएम टिहरी।