चिन्यालीसौड़ में टिहरी झील किनारे बाढ़ सुरक्षा दीवार निर्माण कार्य में टीएचडीसी बाधा बनकर खड़ी हो गई है। झील से हो रहे भू-धंसाव रोकने के लिए पुनर्वास विभाग ने 1200 मीटर सुरक्षा दीवार की योजना तैयार की है, लेकिन टीएचडीसी मात्र 100 मीटर सुरक्षा दीवार बनाकर इतिश्री करना चाहती है।
बांध विशेषज्ञ समिति ने चिन्यालीसौड़ में झील से हो रहे भू-धंसाव रोकने के लिए 1200 मीटर सुरक्षा दीवार की संस्तुति दी थी, लेकिन टीएचडीसी मात्र 100 मीटर सुरक्षा दीवार निर्माण करने पर तुली है। झील के कारण चिन्यालीसौड़ बाजार और आसपास का इलाका पूरी तरह असुरक्षित हो गया है।
भू-धंसाव के कारण चंबा-धरासू हाईवे भी खतरे की जद में है। इसी को देखते हुए वर्ष 2011 में विशेषज्ञ बांध समिति ने चिन्यालीसौड़ का दौरा कर बाजार और राजमार्ग के बचाव के लिए 1200 मीटर सुरक्षा दीवार की संस्तुति की थी। पुनर्वास निदेशालय टिहरी ने करीब 95 करोड़ का आगणन टीएचडीसी को भेजा गया, लेकिन टीएचडीसी ने पुनर्वास विभाग को बजट देने से हाथ खड़े कर दिए।
टीएचडीसी का तर्क है कि 95 करोड़ की धनराशि बहुत ज्यादा है। 11 जून 2015 को सचिव सिंचाई के सामने टीएचडीसी का तर्क है कि पहले किसी कसंलटेंट से इसकी डीपीआर बनाई जाए और उसके बाद धन आवंटन किया जाएगा। पुनर्वास निदेशालय ने 85 लाख में डीपीआर बनाने के लिए निविदा भी निकाली और 15 अक्तूबर को मैगोट इंजीनियरिंग कंपनी देहरादून का डीपीआर के लिए टेंडर स्वीकृत हो गया।
अब टीएचडीसी का कहना है कि चिन्यालीसौड़ में मात्र 100 मीटर दीवार से काम चल जाएगा। टीएचडीसी के तकनीकी निदेशक डीबी सिंह ने इस संबंध में बोलने से स्पष्ट इनकार कर दिया।