टीएचडीसी हाइड्रो संस्थान के छात्रों ने बनाई भांग की ईंट।
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टीएचडीसी हाइड्रो पावर प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी संस्थान के छात्रों ने शिक्षकों के साथ मिलकर भांग की ईंट बनाकर उसकी सफल टेस्टिंग की है। उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन चार में है। ऐसे में भांग से बनी ईंट से ईका-फ्रेंडली घर बनाया जा सकता है।
भागीरथीपुरम स्थित टीएचडीसी इंजीनियरिंग कॉलेज की डीन एकेडमिक डा. रमना त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर अमित कुमार और हैंपक्रीट एक्सपर्ट विनोद ओझा के मार्ग दर्शन में 12 मार्च इलेक्टॉनिक्स इंजीनियरिंग के छात्र अदिति बंदुडी, वैभव सैनी, सुधांशु बहुगुणा ने भांग कि ईंट बनाकर उसकी टेस्टिंग की। छात्रों की ओर से निर्मित ईंट का वजन 1.32 किलो है और 20 दिन सूखने के बाद जब उसका कंप्रेसिव स्ट्रेंथ मापा गया तो 0.34 मेगापास्कल दर्ज किया गया। इसमें ईंट का अल्टीमेट लोड नौ किलो न्यूटन मिला।
डा. रमना ने बताया कि पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक की तर्ज पर अब टिहरी जिले में भी जल्द ही औद्योगिक भांग के पौधों से बनी ईंटों से बने घर और होमस्टे बन सकेंगे। खास बात यह है कि इसमें नशे कि मात्रा भी 0.3 प्रतिशत होती है। भांग से बनी ईंटें एंटी वैक्टीरियल, भूकंप रोधी, जल रोधी, अग्नि रोधी और तापमान सहयोगी होती हैं। बताया कि ईंट बनाने के लिए भांग हस्क, चूना और पानी की जरूरत होती है। चूने की खासियत यह होती है कि वातावरण से कार्बन डाई-ऑक्साइड को अवशोषित करके पत्थर में बदल जाता है। समय के साथ और मजबूत होता जाता है। यदि सरकार का सहयोग मिलता तो भांग और पराली के साथ इको फ्रेंडली मैटेरियल मिलाकर उस पर शोध किया जाएगा।