टिहरी बांध प्रभावितों से संबंधित पुनर्वास स्थलों और पुनर्वासितों को भूमिधर अधिकार नहीं मिलने पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने प्रमुख सचिव सिंचाईं एवं सचिव राजस्व से वाद सुनवाई के दिन 15 फरवरी को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य आंदोलनकारी एवं टिहरी बांध प्रभावित पुनर्वासित जन संयुक्त समिति के संरक्षक प्रेमदत्त जुयाल एवं अध्यक्ष दिनेश डोभाल ने टिहरी बांध परियोजना के विस्थापितों, प्रभावितों व पुनर्वासितों की आठ सूत्री समस्याओं का समयबद्ध निराकरण की मांग को लेकर मानवाधिकार आयोग में वाद दायर किया था।
उन्होंने आयोग को बताया था कि सरकार की ओर से पुनर्वास स्थलों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा की अवशेष सुविधाओं सहित पुनर्वास स्थल पशुलोक, नई टिहरी, भागीरथीपुरम, केदारपुरम आदि में पुनर्वासित परिवारों को भूमिधरी अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। साथ ही टिहरी बांध की झील से प्रभावित प्रतापनगर, भिलंगना, थौलधार, चिन्यालीसौड़ आदि ब्लाकों की लंबित समस्याओं का विशेषज्ञ समिति की संस्तुति के बाद भी निराकरण नहीं हो रहा है।
पुनर्वास स्थलों की समस्याओं को लेकर सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में भूमिधरी अधिकार दिए जाने और सामुदायिक सुविधाओं के लिए 70 करोड़ 52 लाख की जरूरत बताई थी।
टिहरी बांध प्रभावित पुनर्वासित जन संयुक्त समिति के अध्यक्ष दिनेश डोभाल ने बताया कि मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में प्रमुख सचिव सिंचाई, सचिव राजस्व को वाद की सुनवाई तिथि 15 फरवरी को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा आयोग की इस कार्रवाई से विस्थापितों, प्रभावितों को न्याय की आस जगी है।