जिला मुख्यालय के समीप सारज्यूला के क्षेत्र के आधा दर्जन गांव में आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुई। सरकारी एवं गैर सरकारी संपत्तियों का पुनर्निर्माण सात माह बाद भी नहीं होने से आपदा प्रभावित परेशानियों से जूझ रहे हैं। लेकिन प्रशासन प्रभावितों की समस्याओं के निराकरण को कदम नहीं उठा रहा है।
अगस्त 2016 में आई आपदा के चलते अलोमती, सुकलपुर, चवादंत, खेमड़ा, बागी, कौंड, पिपली, बुडोगी, पांगरखाल में करीब 10 हेक्टेयर से अधिक सिंचित भूमि बहने के साथ ही तीन दर्जन सिंचाई गूल, हौज, दो दर्जन संपर्क मार्ग, छह पैदल पुल, आठ पेयजल लाइन और दो एक दर्जन आवासीय भवन आपदा के भेंट चढ़ गए थे।
जिला प्रशासन ने आपदा के दौरान तात्कालिक तौर पर मुआवजा तो प्रभावितों को दिया, लेकिन क्षतिग्रस्त हुई संपत्तियों के पुनर्निर्माण को लेकर कोई भी कदम नहीं उठाए गए हैं। आपदा के भेंट चढ़े खेतों बड़ी मात्रा में आलू, गोभी, मूली, पालक, राई, गेहूं, सरसों आदि की फसल होती थी।
बावजूद अधिकांश भूमि बह गई है, जबकि जो भूमि कृषि करने के लायक बची भी है। इन स्थानों पर सिंचाईं नहरों, हौज की मरम्मत न होने से खेत बंजर पड़े हैं। जिला पंचायत सदस्य रागिनी भट्ट आदि का कहा कि कई बार जिला प्रशासन से लेकर टीएचडीसी से क्षतिग्रस्त संपत्तियों की मरम्मत करने की मांग की गई है, लेकिन वह केवल आश्वासन ही प्रभावितों को दे रहे हैं।