रेडिएशन (विकिरण) की वास्तविक स्थित का जायजा लेने के लिए स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में दो दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई, जिसमें दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने विकिरण के प्रभावों की जानकारी दी।
स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल और पीजी कॉलेज नई टिहरी की संयुक्त पहल पर ‘रेडिएशन अवेयरनेस एंड डिटेक्शन इन नेचुरल एंवॉयरन्मेंट’ विषय पर सम्मलेन का शुभारंभ राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला नई दिल्ली के निदेशक डा. डीके असवाल ने किया। प्रो. आरसी रमोला ने भारत में रेडॉन शोध नेटवर्क के विकास और इसकी गतिविधि बताई।
गढ़वाल केंद्रीय विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि सम्मलेन से समाज के लोगों में विकिरण जागरूकता का संदेश मिलेगा, जिससे स्वास्थ्य में विकिरण संबंधी दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। मुख्य वक्ता कनाडा की पेम वर्किंटन ने कैनेडियन रेडॉन मॉनिटरिंग के बारे में जानकारी दी। प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता हंगरी के वैज्ञानिक तिबोर कोवेक्स और जापान के वैज्ञानिक एसके शाहू ने किया। इटली के वैज्ञानिक फ्रांसिस्को ने बताया की कैसे कार्यस्थलों और घरों में विकिरण के उत्सर्जन से बचा जा सकता है।
आयरलैंड के वैज्ञानिक मैक्लोकिन ने रेडियो एक्टिव गैस रेडॉन द्वारा वातावरण में उत्सर्जित विकिरण की मात्रा के बारे बताया। पोलैंड के वैज्ञानिक कोजेक ने साइक्लोट्रोन व उत्सर्जित गामा विकिरण के बारे में अपना अनुभव साझा किया। कैमरून के वैज्ञानिक शैडो एवं जर्मनी वैज्ञानिक पीटर ने विकिरण शोध के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों जोर दिया। प्रो. पीडी सेमल्टी और मिजोरम केंद्रीय विवि के भौतिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आरसी तिवारी ने अध्यक्षता की।
इस मौके पर नई टिहरी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रेनु नेगी, समन्वयक डा. कुलदीप सिंह, डा. डीपीएस भंडारी, डा. जयेंद्र सजवाण, डा. संदीप बहुगुणा, डा. गुरुपद सिंह गुसाईं, सुभाष चंद्र नौटियाल, अजय बहुगुणा, नवीन रावत, डा. साक्षी शुक्ला, डा. माधुरी कोहली, डा. पूजा रावत, डा. शालिनी रावत, पुस्तकालय अध्यक्ष हंसराज बिष्ट आदि मौजूद थे।