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ग्रामीण नाप रहे 60 किमी की अतिरिक्त दूरी

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जिले के प्रतापनगर और थौलधार ब्लाक को देहरादून से जोड़ने के लिए ग्रामीण लंबे समय से थौलधार-ठांगधार मोटर मार्ग की मांग कर रहे हैं, लेकिन पांच किमी मोटर में आ रही वनभूमि को एनओसी नहीं मिलने से दिक्कत आ रही है। यदि मार्ग बन जाता है, तो दोनों ब्लाकों के लोगों को देहरादून जाने के लिए अभी 185 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, जो सड़क बनने के बाद महज 125 किमी रह जाएगी। उन्हें 60 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर चंबा, ऋषिकेश होते हुए नहीं जाना पड़ेगा।
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थौलधार-ठांगधार मोटर मार्ग निर्माण की मांग वर्षों से चली आ रही है। ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे के एनएच 94 से थौलधार तक सड़क निर्माण कार्य वर्षों पहले पूरा हो चुका है। वहीं सत्यों-देहरादून मोटर मार्ग भी दशकों को पहले से बना हुआ है, लेकिन पांच किमी थौलधार-ठांगधार मार्ग के निर्माण पर आ रही वन भूमि की एनओसी नहीं मिलने से नहीं बन पाया है। यदि मार्ग बन जाता है, तो थौलधार और प्रतापनगर के लोगों को चंबा, नरेंद्रनगर, ऋषिकेश के लिए 185 किमी की दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। मार्ग को थौलधार से सत्यों-देहरादून पर मिलना था, जिसकी देहरादून जाने तक की दूरी करीब 85 किमी है।
राजशाही के जमाने से इस मार्ग पर पैदल आवागमन होता था। बरवालगांव, एक्यूलागी, बंडवालगांव के ग्रामाणों ने कुछ समय पहले श्रमदान कर निर्माण कार्य शुरू किया था, जिस पर वन विभाग ने आपत्ति जताते हुए ग्रामीणों के चालान भी काटे थे। ग्रामीण परिपूर्णानंद सकलानी, राजेश भट्ट, शंभू सकलानी, उम्मेद सिंह सलोनी ने बताया कि मार्ग बन जाता, तो ग्रामीणों को देहरादून आवागमन में 60 किमी की कम दूरी तय करनी पड़ती, जबकि किसानों को अपनी नकदी फसलों को मंडी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी गई थी, लेकिन सेटेलाइट मैपिंग में लोकेशन की तकनीकी से स्वीकृति नहीं मिल पाई है। अब फिर से प्रस्ताव आनलाइन कर भेजा जाएगा।
-आशीष डिमरी, वन रेंज अधिकारी।
हमारे प्रस्ताव पर वन विभाग ने आपत्तियां लगाकर वापस भेज दिया है। जल्द ही उसका निराकरण कर फिर से एनओसी को भेजा जाएगा।
-किशोर कुमार, सहायक अभियंता लोनिवि।
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