मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने फर्जी मस्टररोल सत्यापन करने के आरोप में पूर्व ग्राम विकास अधिकारियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा है। पूर्व प्रधान ने दिवंगत और सरकारी कर्मचारियों को भुगतान कर दिया था, जिसे तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों ने सत्यापित किया था। इस आरोप में पूर्व प्रधान जमानत पर हैं।
भिलंगना ब्लॉक के ग्राम डालगांव निवासी रामचंद्र सिंह राणा ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया था कि तत्कालीन प्रधान रायचंद सिंह ने वर्ष 2003 से 2008 के दौरान मस्टररोल में भारी अनियमितता की है। प्रधान ने ग्राम पंचायत में सरकारी मद से हुए कार्यों में सेना में कार्यरत, शिक्षक और मृतक लोगों को मस्टररोल में मजदूर दर्शाकर उन्हें भुगतान किया था। एसडीएम ने भी जांच में पाया था कि डालगांव के एक व्यक्ति की मृत्यु वर्ष 2002 में हो गई थी।
उसके नाम से मस्टररोल बनाकर एक से 30 नवंबर 2003 तक भुगतान किया गया। इसी तरह गांव के एक और व्यक्ति की मौत एक मई 2005 को हो गई थी। उसे 2008 में भुगतान किया गया। प्रधान ने एक शिक्षक को 2007-08 में मजदूरी का भुगतान किया। गांव के ही गढ़वाल राइफल में तैनात सैनिक का नाम मस्टररोल में दर्ज कर भुगतान किया है। तत्कालीन प्रधान रायचंद जो अभी जमानत पर चल रहे हैं, ने जून 2008 में एक ही मस्टररोल से तीन स्थानों पर दर्शित कर मजदूरी कर भुगतान किया गया है।
सीजेएम चंद्रमणि राय की अदालत ने मस्टररोल सत्यापित करने पर तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी वर्तमान में प्रतापनगर के प्रभारी बीडीओ कीर्ति सिंह पंवार और ग्राम विकास अधिकारी कमलेश्वर प्रसाद की जमानत खारिज कर अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में 14 न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी महेंद्र सिंह बिष्ट ने पैरवी की है।