पुनर्वास विभाग से भूखंड आवंटन संबंधी पत्रावली गायब करने और भूखंड विक्रय करने के बाद परिवर्तन की मांग करने के मामले में पुनर्वास विभाग की ओर से वार्ड सहायक सहित तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
पुनर्वास निदेशालय में भूखंड आवंटन की पत्रावली गायब होने का मामला सामने आने पर प्लॉट को लेकर किया गया फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है।
अधिशासी अभियंता अवस्थापना पुनर्वास खंड डीके सिंह की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि रमेश चंद्र पुत्र महेंद्र को वर्ष 2000 में बौराड़ी में भूखंड आवंटित किया गया था।
भूस्वामी ने प्लाट बेचने की सूचना दिए बगैर भूखंड बदलने के लिए आवेदन किया जिसकी फाइल निदेशालय से गायब हो गई थी। फाइल उपलब्ध कराने के लिए विक्रेता की ओर से आरटीआई के तहत सूचना मांगी, लेकिन फाइल गायब होने के कारण सूचना नहीं दी जा सकी जिस पर प्रार्थी की ओर से सूचना आयोग में अपील की गई। सूचना आयोग ने वार्ड सहायक होशियार सिंह सजवाण के विरुद्व प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि भूखंड बेचने के बाद परिवर्तन करने की मांग करने और अधिवक्ता की ओर से सत्यापित हस्ताक्षर में भिन्नता होने से गड़बड़ी सामने आई है। जिससे वार्ड सहायक के साथ ही भूस्वामी रमेश चंद्र और अधिवक्ता अरविंद सिंह खरोला के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने के मामले में प्राथमिक दर्ज कराई गई है। थानाध्यक्ष विजय चंद्र गुसार्इं ने बताया कि तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूट रचना करने का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।