टिहरी बांध पुनर्वास निदेशालय घपलों का पर्याय बनता जा रहा है। शहर में भूखंड आवंटन संबंधी एक जांच में हुआ खुलासा इसकी तस्दीक करता है, जिसमें पुनर्वास खंड के अधिकारियों की मिलीभगत से 60-60 वर्ग मीटर की पात्रता रखने वाले चार व्यक्तियों को 100 वर्ग मी. प्रतिव्यक्ति के हिसाब से भूखंड आवंटित कर दिए गए हैं।
पुनर्वास निदेशक द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट में उपजिलाधिकारी ने भूखंड आवंटन निरस्त कर नए सिरे से पात्रता निर्धारण की बात कही गई है। इतना ही नहीं जांच अधिकारी की ओर से मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।
पुनर्वास खंड में भूखंड आवंटन के एक मामले में कराई गई जांच मेें फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आया है। पुनर्वास निदेशक एवं जिलाधिकारी इंदुधर बौड़ाई की ओर से बीते अगस्त में पुनर्वास खंड की ओर से आवंटित किए गए भूखंडों के मामले की उपजिलाधिकारी टिहरी से जांच कराई गई थी।
एसडीएम चतर सिंह की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट में मामले का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पुरानी टिहरी नगर निकाय के वार्ड नं. सात में पांच लोगों के पूर्वजों के नाम कुल 2275 वर्ग फिट जमीन दर्ज थी।
उस भूमि को टिहरी बांध निर्माण के लिए अर्जन किया गया, जिसकी एवज में उन्हें नई टिहरी शहर में भूमि दी जानी थी। इसी साल फरवरी में पुनर्वास खंड की ओर से पांच पात्र लोगों में से चार को भूखंडों पर कब्जा दिलाया गया, जिसमें निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई। जांच अधिकारी द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार 2275 वर्ग फीट जमीन को भूखंडों के आवंटन में वर्ग मीटर में दर्शाया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि नियमानुसार चारों व्यक्तियों की पात्रता 60-60 वर्ग मी. बनती थी, लेकिन उन्हें प्रतिव्यक्ति 100 वर्ग मीटर के भूखंड आवंटित किए गए हैं। उधर, इस बाबत पुनर्वास निदेशक इंदुधर बौड़ाई ने माना कि भूखंड आवंटन में फर्जीवाड़ा हुआ है। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।