कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी बांध की झील का जलस्तर बढ़ने पर पुनर्वास विभाग ने छाम-बैल्डोगी नाव सेवा तो शुरू कर दी है, लेकिन झील तक पहुंचने के लिए रास्तों की मरम्मत और झाड़ियों का कटान नहीं होने के कारण लोगों को वोट तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है। लोगों ने पुनर्वास विभाग से पक्के रास्ते का निर्माण करने की मांग की है।
टिहरी झील के आरपार बसे जिले के गुसाईं पट्टी और उत्तरकाशी के दिचली-गमरी पट्टी के गांवों में निवासरत लोगों के आवागमन के लिए पुनर्वास विभाग की ओर से नाव का संचालन किया जाता है। झील का जलस्तर कम होने पर अप्रैल, मई में बोट सेवा बंद कर दी जाती है, जिससे गुसाईं पट्टी और दिचली-गमरी पट्टी के लोगों को अपने गतंव्य तक पहुंचने के लिए 40 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। पूर्व प्रधान सावन सिंह असवाल ने पुनर्वास विभाग से गांव की तरफ आरसीसी से पक्का रास्ता निर्माण करने की मांग की है।
नाव चलाने वाले राजवीर ने बताया प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक लोग आरपार होते हैं। झील तक पहुंचने के लिए यदि दोनों तरफ पक्का रास्ता बन जाता है तो यह संख्या और भी बढ़ सकती है। ईई धीरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि छाम-बैल्डोगी नाव को जाने वाले रास्ते की झाड़ियां एक-दो दिन में कटवा दी जाएगी। रास्तों की मरम्मत करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।