भिलंगना ब्लाक के असेना (देवरी) के 53 अनुसूचित जाति के परिवारों का पुनर्वास 14 साल बाद भी नहीं हो पाया है। ग्रामीण पुनर्वास को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार ने सामान्य जाति के परिवारों को तो कृषि, आवासीय भूखंड देकर पुनर्वासित कर दिया है, लेकिन एससी के परिवारों को केवल नकद प्रतिकर एवं आवासीय भूखंड दिया है।
टीएचडीसी एवं जिला प्रशासन ने टिहरी बांध के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले रेत-पत्थर के चुगान के लिए असेना गांव का पुनर्वास किया था। वर्ष 2002 में तीन अनुसूचित जाति सहित 110 परिवारों का कृषि एवं आवासीय भूखंड देकर पुनर्वास किया गया, लेकिन अनुसूचित जाति के 53 में से अभी तक 36 परिवारों को आवासीय भूखंड और पांच-पांच लाख रुपये नकद प्रतिकर ही दिया गया।
जबकि 16 परिवार आवासीय भूखंड से अभी भी वंचित हैं। ग्रामीण सभी 53 परिवारों को कृषि भूखंड एवं शेष 16 परिवारों को आवासीय भूखंड देने की मांग को लेकर संघर्षरत हैं। ग्रामीण सच्चू मिस्त्री, ललिता, चैता देवी, सुंदरा देवी, सुमित्रा देवी, सौंणी देवी, सुचिता, लखणी आदि का कहना है कि खनन के कारण आवासीय भवन, कृषि भूमि, पेयजल स्रोत, हौज, गूल, देवस्थन, स्कूल सहित अन्य संपत्तियां खतरे की जद में हैं।
जिला प्रशासन ने उन्हें 2012 में हुए आंदोलन के दौरान तत्कालीन पुनर्वास निदेशक एवं टीएचडीसी के अधिकारियों ने कृषि भूखंड देने का आश्वासन दिया था। बावजूद अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।