टीएचडीसी पर बांध प्रभावितों की उपेक्षा का लगाया आरोप
नई टिहरी। कोटेश्वर बांध प्रभावित क्षेत्र के गांवों को टीएचडीसी की ओर से सीएसआर मद में जारी धनराशि का अपेक्षित लाभ नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बांध के डूब और आंशिक डूब क्षेत्र से प्रभावित मखलोगी, धार अकरिया, क्वीली और पालकोट पट्टी के गांवों की सीएसआर मद में लगातार उपेक्षा की जा रही है।
रविवार को पोखरी में जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक में स्थानीय लोगों ने कहा कि कोटेश्वर बांध के निकट पूर्व में किए गए सांकेतिक चक्का जाम के दौरान टीएचडीसी के अधिकारियों ने वार्ता के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था। अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया था।
बैठक में ग्रामीणों ने तय किया कि प्रभावित क्षेत्र की समस्याओं को लेकर एक शिष्टमंडल टीएचडीसी ऋषिकेश जाकर अधिकारियों से वार्ता करेगा। वार्ता सकारात्मक नहीं होने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि बांध प्रभावित क्षेत्रों में सीएसआर मद की धनराशि से विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए लेकिन प्रभावित गांवों को अधिकारियों की उदासीनता से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। बांध के कारण कई गांव डूब और आंशिक डूब क्षेत्र में हैं।
पयालगांव में झील के कारण भू-धंसाव का खतरा बना है। मकान, जमीन और आंगन में दरारें पड़ी है लेकिन समस्या के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। बांध परियोजना से प्रभावित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं दिए जा रहे है। बैठक में जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह असवाल, प्रधान सैण धन सिंह सजवाण, मुकेश बिजल्वाण मौजूद रहे।