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छात्रों को धनराशि नहीं अब किताबें देगा शिक्षा विभाग

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माध्यमिक शिक्षा परिषद शिक्षा सत्र शुरू होने के छह माह बाद भी छात्रों को निशुल्क किताबें नहीं दे पाया है। पहले निदेशालय ने पिछले सालों की भांति किताबों के बदले छात्रों को नकद धनराशि देने का निर्णय लिया था, लेकिन अब किताबें देने का ही फरमान सुनाते हुए जिलों से डिमांड मांगी है। विभागीय कामकाज इसी ढर्रे पर चलता रहा तो किताबें नवंबर माह तक ही स्कूलों में पहुंच पाएंगी। जबकि किताबों के बदले नकद धनराशि मिलने के चलते अधिकतर अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए पहले ही बाजार से एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकें जुटा ली हैं।
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शिक्षा विभाग एक अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू होने के छह माह बाद भी छात्रों को किताबें नहीं दे पाया है। विभाग कक्षा एक से आठ तक के सभी छात्रों और कक्षा नौ से 12वीं तक एससी-एसटी के छात्रों को किताबें खरीदने के लिए दो साल से नकद धनराशि दे रहा था। आवंटित धनराशि जून माह में सभी ब्लाक शिक्षाधिकारियों को भेज दी गई थी, लेकिन ढाई माह बाद 16 सितंबर को निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने सभी सीईओ को पत्र जारी कर कोविड-19 का हवाला देते हुए अब छात्रों को नकद के बदले निशुल्क किताबें देने का निर्णय लेकर आवंटित धनराशि वापस मंगाई है। निदेशालय ने अब जिलों से कक्षावार किताबों की डिमांड मांगी है। ऐसे में अब छात्रों को नवंबर माह तक ही किताबें मिल पाएंगी। जबकि अधिकतर अभिभावकों ने पहले ही किताबें खरीद ली हैं। अभिभावक दिनेश भट्ट और सविता ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए अप्रैल माह में ही किताबें खरीद ली थी।
छात्रों को नकद धनराशि देने के लिए सभी बीईओ को जून में पैसा भेज दिया था, लेकिन अब निदेशालय से छात्रों को किताबें देने का निर्णय लिया गया है। जब तक स्कूल खुलते हैं, तब तक किताबें पहुंच ही जाएंगी। कोविड-19 के कारण पाठ्यक्रम में 30 से 50 फीसदी कटौती की जा सकती है।
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- सुदर्शन सिंह बिष्ट, डीईओ (बेसिक) टिहरी।
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