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53 अनुसूचित जाति के परिवारों का पुनर्वास नहीं

Tue, 16 Feb 2016 08:47 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला नई टिहरी
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महिला संघर्ष समिति असेना ने 53 अनुसूचित जाति के परिवारों का लंबे समय बाद भी पुनर्वास न होने पर रोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन एवं टीएचडीसी ने सामान्य जाति के सभी परिवारों को पुनर्वासित कर दिया है। लेकिन अनुसूचित जाति के परिवारों का नहीं हुआ है। अब सरकार ने असेना में खनन की अनुमति दे दी है। कहा कि अब खनन कारोबारी ग्रामीणों को डरा-धमका रहे हैं।
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प्रभावित ग्रामीणों ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2002 के सर्वे के अनुसार गांव का पूर्ण पुनर्वास किया जाना है। इसमें से टीएचडीसी एवं पुनर्वास ने तीन अनुसूचित जाति सहित 110 परिवारों को ही पुर्नवासित किया है। जबकि 53 एससी परिवारों को ऐसे ही छोड़ दिया गया है। बताया कि टिहरी बांध और असेना खनन के कारण आवासीय भवन, कृषि भूमि, पेयजल स्रोत, हौज, गूल, देवस्थन सहित अन्य संपत्तियां खतरे की जद में हैं।

आश्वासन मिला, पुनर्वास नहीं
वर्ष 2012 में हुए आंदोलन के दौरान तत्कालीन पुनर्वास निदेशक एवं टीएचडीसी के अधिकारियों ने ग्रामीणों का जल्द पुनर्वास होने का आश्वासन दिया था लेकिन हुआ नहीं। फिर से सरकार ने टीएचडीसी को असेना में खनन की अनुमति प्रदान कर दी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खनन माफिया ग्राम प्रधान के रिश्तेदार होने के कारण एससी परिवारों को डरा धमका रहे हैं। इससे लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि यदि जल्द विस्थापन नहीं हुआ, तो खनन शुरू नहीं होने दिया जाएगा। खनन स्थल पर ही बेमियादी आंदोलन शुरू किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य शिवलाल, सच्चू मिस्त्री, ललिता, चैता देवी, सुंदरा देवी, सुमित्रा देवी, सौंणी देवी, सूचिता,लखणी, मंगला, मंजू, सुशीला, मममता, बबली और बिरजा आदि मौजूद थी।
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