टीएचडीसी इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रो पावर इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी भागीरथीपुरम में शिक्षकों और प्रबंधन के बीच चल रहा नियमितीकरण संबंधी विवाद पर विराम लग गया है। हाईकोर्ट नैनीताल ने कार्यरत टीचिंग एवं नॉन टीचिंग स्वीकृत पदों पर कार्यरत कमियों को नियमित मानते हुए विवि एवं इंस्टीट्यूट प्रबंधन को नियमितीकरण के संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता टीएचडीसी इंजीनियरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. एके सिंह ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि इंस्टीट्यूट में कार्यरत टीचिंग एवं नॉन टीचिंग में कार्यरत कर्मचारियों की एक साल की सेवा पूरी होने पर जून 2012 में उत्तराखंड तकनीकी विवि ने साक्षात्कार के माध्यम से कर्मियों को नियमित कर दिया था, लेकिन अक्तूबर 2012 में यूटीयू ने शुद्धि पत्र निकाल कर सभी नियुक्तियां को अस्थायी समझी जाए का आदेश जारी कर दिया।
इसके पीछे तर्क दिया गया कि उपरोक्त पद राज्य सरकार से स्वीकृत नहीं हैं, जिसके अनुपालन में इंस्टीट्यूट प्रबंधन ने इन पदों को संविदा मानकर मानदेय में निर्धारित कर दिया। इसके विरुद्ध में डा. एके सिंह जून 2014 को हाईकोर्ट गए थे। उन्होंने बताया कि एक दिसंबर को हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि कर्मचारियों को दिए गए नियुक्ति पत्र एवं नियुक्ति में अपनाई गई प्रक्रिया को सही मानते हुए कार्यरत टीचिंग के 30 एवं नॉन टीचिंग के करीब 40 कर्मियों को नियमित करने के निर्देश विवि एवं इंस्टीट्यूट प्रबंधन को दिए हैं।