जाखणीधार ब्लाक के कस्तल गांव में बालिका को मारने वाला आदमखोर गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया है। दहशत का पर्याय बन चुके गुलदार के पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन कर्मियों ने गुलदार का स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे रेस्क्यू सेंटर चिड़ियापुर हरिद्वार में छोड़ा है।
कस्तल गांव में 20 फरवरी को शाम साढ़े छह बजे स्व. धर्म सिंह बगियाल की छह वर्षीय पुत्री रेनुका को गुलदार ने घर के आंगन से उठाकर मार डाला था। गांव में गुलदार की जबरदस्त दहशत थी। ग्रामीण गुलदार को आदमखोर घोषित कर शूटर तैनात करने की मांग कर रहे थे।
वन विभाग ने 20 फरवरी रात को ही जिस स्थान पर बालिका का शव मिला, वहां पिंजरा लगा दिया था। साथ ही वन कर्मी भी गांव में ही कैंप लगाए बैठे थे, लेकिन गुलदार पिंजरे के आसपास नहीं फटक रहा था। 22 फरवरी को प्रभागीय वनाधिकारी डा. कोको रोसो भी कस्तल गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ विचार विमर्श कर दूसरा पिंजरा भी लगवाया।
इसके बाद रात नौ बजे गुलदार शिकार की ताक में पिंजरे के पास पहुंचने से कैद हो गया। वन कर्मियों ने पिंजरे में कैद हुए गुलदार का बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य परीक्षण कर उसे चिड़ियापुर हरिद्वार स्थित रेक्स्यू सेंटर छोड़ दिया। गुलदार के पकड़ने जाने से ग्रामीणों एवं वन कर्मियों ने राहत की सांस ली।
आठ वर्ष से अधिक उम्र का है गुलदार, दांत भी घिसे हैं
ग्रामीणों के सहयोग और वन कर्मियों की सूझबूझ से गुलदार पिंजरे में कैद हुआ है। मेडिकल परीक्षण के बाद उसे चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में छोड़ दिया गया है। आठ साल से अधिक उम्र के इस गुलदार के दांत घिसे हुए हैं, यह काफी थका हुआ था, ऐसी स्थिति में कोई भी गुलदार जंगल छोड़कर आसान शिकार की तलाश में बस्ती का रुख करता है।
इससे स्पष्ट होता है कि इसी गुलदार के हमले में बालिका की मौत हुई है। पीड़ित परिवार को 90 हजार मुआवजा दिया गया है। जल्द ही दो लाख 10 हजार की दूसरी किश्त परिजनों को दी जाएगी।
-डा. कोको रोसो, प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी