कंडी पेयजल योजना सफेद हाथी साबित हो रही है। योजना से पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति नहीं होने से लोगों की प्यास नहीं बुझ पा रही है। पानी वितरण के लिए जल संस्थान और जल निगम में तालमेल नहीं होने का खामियाजा भी लोगों को भुगतना पड़ रहा है। अव्यवस्था के लिए दोनों विभाग एक- दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं।
ब्लॉक मुख्यालय कंडीसौड़ क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 1997-98 में पीपलमंडी पेयजल योजना बनी थी। इस योजना पर पानी कम होने से वर्ष 2012 में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने डेढ़ करोड़ की लागत से कंडी पेयजल योजना की स्वीकृति दी थी। कार्यदायी संस्था जल निगम आठ माह पहले योजना का निर्माण पूरा कर चुका है। पानी वितरण के लिए अगल-अलग स्थानों पर 22 स्टैंड पोस्ट भी बनाए गए है। बावजूद इसके योजना से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कंडी योजना बनने के बाद कार्यदायी संस्था ने सुबह और शाम को पानी मुहैया कराने का दावा किया था, लेकिन स्थिति यह है कि लोगों को एक समय भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। प्रेम सिंह गुसाईं, भागचंद रमोला, लाखीराम उनियाल, नौबर सिंह गुसाईं, सरिता देवी व सच्चिदानंद का कहना है कि जल संस्थान और जल निगम में तालमेल नहीं होने से योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि दोनों विभागों ने अपनी कार्य प्रणाली में सुधार नहीं लाया तो क्षेत्रवासी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि कंडी पेयजल योजना बनकर तैयार है। जल निगम को सिर्फ योजना बनाने का काम दिया
गया था। वितरण जल संस्थान को करना है। जल संस्थान लाइन को हैंडओवर नहीं कर
रहा है।