कांवड़ यात्रियों को उठानी पड़ रही खासी दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई टिहरी। कांवड़ यात्रा का पैदल झाला-बेलक-भटवाड़ी मार्ग एक साल पहले आई आपदा से क्षतिग्रस्त हो गया था जिससे कांवड़ यात्रियों को मार्ग पर सफर करने में खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। मार्ग से यात्री गंगोत्री से गंगाजल भरकर पैदल बूढ़ाकेदार और केदारनाथ मंदिर में जल चढ़ाने जाते हैं।
2022 की आपदा ने बूढ़ाकेदार क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई थी। धर्मगंगा नदी में उफान से झाला के पास 500 मीटर हिस्सा बह गया था। बूढ़ाकेदार क्षेत्र के सुरेंद्र पंवार, गब्बर सिंह, धर्म सिंह जखेड़ी, राजपाल पंवार, हिमा गुनसोला और मालचंद बिष्ट का कहना है कि कांवड़ यात्रा के अलावा मार्ग से स्थानीय लोग बड़ी संख्या में आवाजाही करते हैं। कांवड़ यात्री गंगोत्री से जलकर भरकर झाला-बेलक-भटवाड़ी से बूढ़ाकेदार गंगाजल चढ़ाने जाते हैं। कुछ कांवड़ यात्री बूढ़ाकेदार से विनकखाल-सांकरी-घुत्तू-पंवाली कांठा-त्रियुगीनारायण होते ही पैदल केदारनाथ जल चढ़ाने जाते हैं। बावजूद इसके मार्ग नहीं सुधारा जा रहा है।
लोनिवि के ईई जगदीश खाती का कहना है कि गत वर्ष पूरा मार्ग बह गया था। फिलहाल झाला में यात्रियों के चलने लायक वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है जबकि डीएफओ पुनीत तोमर का कहना है कि भिलंगना रेंज कार्यालय की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव मिला है जिसकी शासन स्तर से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
जारी-विजयदास