कंडीसौड़ (टिहरी)। नगुन पट्टी के गांवों को जोड़ने वाली मैंडखाल-भंडारकी सड़क खस्ताहाल बनी है। 12 किमी लंबी सड़क पर डामरीकरण के अभाव में जगह-जगह गड्ढे बने हैं। मार्ग से गैर, लोदाडी सहित 12 राजस्व गांवों के लोग आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की दुर्दशा ने उनके सफर को जोखिम भरा बना दिया है।
मैंडखाल-भंडारकी सड़क पर चार साल पहले किए गए डामरीकरण का हाल यह है कि गड्ढों में खड़ा पानी और उखड़ा हुआ डामर हर गुजरने वाले को परेशान कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर चलते समय वाहन चालक और पैदल यात्री दोनों ही असुरक्षित महसूस करते हैं। गत वर्ष मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कांगुड़ा मंदिर दौरे के दौरान ग्रामीणों ने सड़क की दुर्दशा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
चिरंजी लाल भट्ट ने बताया कि जब डामरीकरण का काम हो रहा था, तब ठेकेदार और विभाग ने बड़ी मशीनों के इस्तेमाल की बात को नजरअंदाज कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि सड़क पर किया गया डामरीकरण कुछ ही समय में उखड़ने लगा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गर्मियों के दिनों में डामरीकरण होता तो सड़क मजबूत बनती, लेकिन सर्दियों में काम करने से डामर टिक नहीं पाया। दोपहिया वाहनों लिए यह सड़क जानलेवा साबित हो रही है। कई बार हादसे हो चुके हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है।
पूर्व प्रधान भूरिया सिंह राणा, सुरेंद्र सेमवाल, रमेश प्रसाद नौटियाल ने बताया कि मैंडखाल से मौर्याणा होते हुए देहरादून जाने वाली छोटे वाहन प्रतिदिन मार्ग से गुजरती है। खराब सड़क की वजह से वाहनों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बाबत पीएमजीएसवाई के अवर अभियंता आनंद सिंह बिष्ट ने बताया कि आगामी मार्च के बाद सड़क के गड्ढों को भरने, नालियों के निर्माण और मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। सड़क के लिए नया इस्टीमेट तैयार कर शासन को भेजा गया है।