एक होनहार खिलाड़ी को राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने से वंचित रखने के मामले में अब शिक्षा विभाग के अधिकारी एक-दूसरे को जिम्मेदार बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। थौलधार की खंड शिक्षा अधिकारी का कहना है कि
देर से सूचना मिलने पर वह खिलाड़ी को हवाई सेवा से नेशनल खेलने भेजने को तैयार थी, लेकिन विभागीय उच्च अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी।
थौलधार ब्लाक के राइंका बेरगणी पाली के 11वीं कक्षा का छात्र मनीष पाल का चयन राष्ट्रीय स्तर की अंडर 17 कबड्डी प्रतियोगिता के लिए हुआ था। कर्नाटक में नेशनल कबड्डी प्रतियोगिता 19 नवंबर से होनी है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शिरकत करने के लिए राज्य के खिलाड़ियों की टीम को 15 नवंबर को देहरादून से रवाना हो गई, लेकिन अधिकारियों ने मनीष पाल और उसके कोच जय सिंह कठैत को सूचना देनी जरूरी नहीं समझी। अगले दिन 16 नवंबर को कोच को सूचना दी। तब तक टीम दिल्ली पहुंच चुकी थी।
18 नवंबर को अमर उजाला ने खिलाड़ी के साथ हुए छलावा की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद बीईओ विनीता कठैत का कहना है कि खिलाड़ी के संबंध में उन्हें कोई मेल नहीं मिली है। विभागीय उच्च अधिकारियों को चाहिए कि वे किसी तकनीकी विशेषज्ञ से मेल की जांच कराए। उन्हें 16 नवंबर को कोच जय सिंह कठैत से सूचना मिली, तो उन्होंने सीईओ को फोन कर मनीष को नेशनल खेलने के लिए हवाई सेवा से दिल्ली भेजने की बात कही। तब तक अन्य खिलाड़ी दिल्ली ही पहुंचे थे, जिस पर सीईओ ने कोई भी जवाब नहीं दिया। इस बाबत सीईओ एसपी सेमवाल का कहना है कि आनन-फानन में खिलाड़ी को हवाई सेवा से भेजना संभव नहीं था।