अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह ने कहा कि 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील में मिलने वाली लघु जल धाराओं के आसपास स्थानीय लोगों को मत्स्य आखेट के लिए लाइसेंस दिए जाएंगे। झील में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जन सहभागिता के माध्यम से इको टूरिज्म विकास योजना को गति दी जाएगी। उन्होंने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को कोटेश्वर हेचरी के विकास और सुधारीकरण के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। इसके के लिए 10 लाख का प्रस्ताव जल्द शासन को भेजने के निर्देश दिए।
जिला सभागार में आयोजित मत्स्य आखेट संबंधी कार्ययोजना की समीक्षा बैठक लेते हुए अपर मुख्य सचिव डा. सिंह ने कहा कि मत्स्य आखेट के लिए गांवों से जुड़ी स्वयं सेवी संस्थाओं, महिला मंगल दल, युवक मंगल दलों को न्यूनतम दर पर लाइसेंस दिया जाएगा। टिहरी झील से जुड़ने वाली 11 लघु जलधाराओं को महाशीर मछली उत्पादन और संचय के लिए चयनित किया गया है। महाशीर के उत्पादन और संरक्षण को बढ़ाकर वैज्ञानिक तरीके से दोहन कर रोजगार से जोड़ा जाएगा।
मत्स्य उत्पादन से जुड़े स्थानीय लोगों को विभाग की ओर से मुंबई में प्रशिक्षण देने की योजना भी है। टिहरी झील में संचालित होने वाली मत्स्य विभाग की बोट का संचालन नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए शीघ्र ही बोट को ठीक करने के निर्देश दिए। बैठक में डीएम ज्योति नीरज खैरवाल, मत्स्य विकास विभाग के उपनिदेशक नियोजन एचके पुरोहित, उप निदेशक राजेंद्र लाल आर्य, सहायक निदेश अल्पना हल्दिाय आदि उपस्थित थे।