लॉकडाउन के दौरान सीमांत गंगी गांव के जंगल में सैकड़ों हरे पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। हैरत यह है कि वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले में डीएम मंगेश घिल्डियाल ने डीएफओ, टिहरी डॉ. कोको रासे से रिपोर्ट तलब की है। पेड़ काटने वालों को चिन्हित कर उन पर रिपोर्ट दर्ज कराने को कहा है।
गंगी गांव के लोगों ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन के दौरान बाहरी व्यक्तियों के गांव में आने पर प्रतिबंध लगाया था। इस दौरान गांव से तीन किमी दूर ताल नामे तोक के जंगल में बांज, बुरांस, भमोर और थुनैर प्रजाति के सैकड़ों पेड़ों का सफाया हो गया। ताल नामे तोक में पेड़ काटे जाने के बाद वहां अवैध रूप से पांच-छह छानियों का निर्माण चल रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ किसने और क्यों काटे वन और राजस्व विभाग अधिकारियों के पास इसका जबाव नहीं है। राजस्व उप निरीक्षक राधाकृष्ण बिजल्वाण ने बताय कि पेड़ काटे जाने की सूचना पर वे बीते दिन गंगी गांव के ताल नामे तोक पहुंचे। वहां मौके पर भारी संख्या में हरे पेड़ कटे मिले। काटे गए पेड़ों के स्थान पर पांच-छह छानियां निर्माणाधीन है। कहा कि इस संबंध में तहसील प्रशासन को भेज दी गई है।
गंगी गांव में हरे पेड़ काटे जाने की रिपोर्ट टिहरी वन प्रभाग के डीएफओ से मांगी गई है। दोषियों के खिलाफ डीएफओ रिपोर्ट दर्ज करांएगे। कितने पेड़ कटे है यह अभी स्पष्ट नहीं है।
-मंगेश घिल्डियाल, डीएम, टिहरी
गंगी गांव में पेड़ काटे जाने की जांच की जा रही है। रेंज अधिकारी और वन कर्मियों को मौके पर जाकर जांच करने को कहा गया है। गंगी और आसपास के इलाकों में कांबिंग चल रही है।
-डॉ. कोको रोसे, डीएफओ, टिहरी वन प्रभाग