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ऊर्जा निगम ने काटी डेरी की बिजली

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दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की आंचल डेरी पर घिरे संकट के बादल नहीं छंट पा रहे हैं। लगातार घाटे में चल रही डेरी कर्मचारियों को जहां लंबे समय से वेतन नहीं मिल पाया है, वहीं डेरी प्रबंधन बिजली और पानी के बिलों का भुगतान भी नहीं कर पा रहा है। बिजली बिल का भुगतान नहीं करने पर ऊर्जा निगम ने डेरी उद्योग की बिजली काट दी है। जिससे दूध को सुरक्षित रखने के लिए प्रबंधन को डीजल खरीदकर जेनरेटर से काम चलाना पड़ रहा है। यही नहीं पेयजल कनेक्शन का भुगतान नहीं होने पर जल संस्थान ने भी कनेक्शन काटने की चेतावनी दी है।
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लघु उद्यम के रूप में दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की आंचल डेरी यहां एच ब्लाक में वर्ष 1990 में शुरू की गई थी। शुरूआती दौर में डेरी में पांच हजार लीटर से अधिक का उपार्जन था, लेकिन मैनेजमेंट की लापरवाही के कारण कुछ सालों बाद दुग्ध उपार्जन लगातार घटते हुए इन दिनों कुल एक हजार लीटर तक तक पहुंच गया है। दुग्ध उपार्जन घटने से डेरी की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल हो गई है। अब डेरी की स्थिति यह हो गई है कि बिजली बिल का करीब पांच लाख रुपये का भुगतान नहीं करने से ऊर्जा निगम ने फरवरी में कनेक्शन काट दिया है। पेयजल कनेक्शन का भी करीब साढ़े चार लाख में से एक लाख ही जमा कराने पर जल संस्थान ने भी संयोजन काटने की चेतावनी दी है। बिजली नहीं होने के कारण दुग्ध प्लांट का संचालन करने के लिए जेनरेटर पर प्रतिदिन 80 लीटर डीजल की खपत हो रही है, जो बिजली से काफी मंहगा पड़ रहा है।
कार्मिकों को 48 माह का वेतन नहीं मिला
आंचल डेरी की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर इन चार-पांच सालों में डेरी प्रबंधन ने करीब दर्जनभर कर्मचारियों को बीआरएस दिया है। उसके बाद अब प्लांट में 10 कर्मचारी रह गए हैं, उन्हें भी 48 माह से वेतन नहीं मिल पाया है। पीआरडी से लगाए गए तीन कर्मचारियों को भी ढाई साल से वेतन नहीं मिल पाया है, जिससे कर्मचारियों को काफी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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आंचल डेरी पर ऊर्जा निगम का आठ लाख बकाया चल रहा था, करीब तीन लाख भुगतान करने पर बकाया कम कर दिया था। ऊर्जा निगम ने बड़े बकाएदारों के बजाए घाटे में चल रहे दुग्ध संघ की बिजली काटी है। इससे दुग्ध प्लांट चलाना मुश्किल हो रहा है।
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-जगदंबा बेलवाल, अध्यक्ष दुग्ध सहकारी संघ।
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