टिहरी बांध प्रभावित सरोट के ग्रामीणों ने पुनर्वास निदेशालय पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वह झील में डूबी भूमि के बदले भूमि देने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन 10 साल बाद भी उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों ने एसडीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि सरोट में निवासरत 150 में से 142 परिवारों का विस्थापन किया गया है, लेकिन पुनर्वास नीति के तहत शेष आठ परिवारों का पुनर्वास नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पुनर्वास से वंचित परिवारों की 46 प्रतिशत तक उपजाऊ भूमि बांध की झील में समा चुकी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के पास जो भूमि बची हुई है, वह बंजर है। जितनी राशि निदेशालय दे रहा है, उससे उपजाऊ भूमि मिलना संभव नहीं है। नीति के तहत वंचित आठ परिवारों का जल्द पूर्ण विस्थापन नहीं किया गया, तो पुनर्वास निदेशालय में बेमियादी धरना शुरू किया जाएगा।
ज्ञापन देने वालों में पूर्व प्रधान शूरवीर सिंह राणा, अतोल सिंह चौहान, भाग सिंह राणा, पुलम सिंह, धीरज सिंह, नीवन और रुकम सिंह चौहान आदि शामिल थे।