सूखे का असर टिहरी बांध की झील एवं विद्युत उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। झील में भागीरथी व भिलंगना नदी से जहां पहले तीन सौ से चार सौ क्यूमेक्स पानी आता था, वहीं अब महज 196 क्यूमेक्स पानी आ रहा है।
पानी कम होने से टिहरी बांध से विद्युत उत्पादन भी घटकर साढ़े पांच मिलियन यूनिट हो गया है, जबकि पहले यह उत्पादन 12 से 15 मिलियन यूनिट होता था। उत्पादन घटने से गर्मियों में बिजली संकट बढ़ सकता है।
बारिश नहीं होने से झील का जलस्तर आरएल 756.15 (रिजर्व वाटर लेबल) मीटर पहुंच गया है। बांध से 172 क्यूमेक्स पानी की निकासी की जा रही है। भागीरथी से 164 और भिलंगना नदी से 32 क्यूमेक्स पानी ही आ रहा है।
मानसून के दौरान टीएचडीसी ने टिहरी झील को आरएल 823 मीटर तक भरा था। तब टीएचडीसी बांध की चारों टरबाइनों को चलाकर 12 से 15 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा था। इस वर्ष ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी और बारिश अधिक नहीं होने से नदियों में अप्रैल में ही पानी की कमी हो गई है।
ऐसे में जल्द बारिश नहीं हुई, तो मई-जून में पानी और कम हो सकता है। साथ ही उत्तराखंड के मैदानी जिलों समेत दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश में सिंचाई, पेयजल और विद्युत किल्लत बढ़ सकती है।
गर्मियों में जलस्तर में गिरावट स्वाभाविक है। ग्रिड से डिमांड के आधार पर ही विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। वर्तमान में 5.5 मिलियन यूनिट उत्पादन हो रहा है।-यूके ठाकुर, अपर महाप्रबंधक टीएचडीसी।