हिमालयी क्षेत्र के मौसम में आ रहे परिवर्तनों का अब सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। मौसम विभाग यहां सुरकंडा मंदिर क्षेत्र में डॉप्लर रडार लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
केदारनाथ में 16 जून 2013 में आई भीषण आपदा के बाद से क्षेत्र में डॉप्लर रडार लगाने की मांग की जा रही थी, जिससे हिमालय क्षेत्र में लगातार प्राकृतिक आपदाओं और मौसम में आ रहे बदलावों की सटीक जानकारी मिल सके। तेज बारिश और मौसम संबंधी अन्य सटीक सूचनाओं को प्रसारित करने के लिए उत्तराखंड मौसम विभाग ने सुरकंडा मंदिर क्षेत्र में डॉप्लर रडार लगाने की दिशा में काम शुरू करने की तैयारी शुरू कर है। विशेषज्ञों के अनुसार डॉप्लर रडार ऊंचाई वाले स्थानों पर लगाया जाता है, जिससे सूक्ष्म से सूक्ष्म तरंग भी बिना किसी बाधा के रडार तक पहुंच सके। डॉप्लर रडार से तेज बारिश, ओलावृष्टि और बादल फटने की जानकारी करीब दो घंटे पहले मिल सकेगी। यह 100 किमी परिधि के दायरे में होने वाली गतिविधियों का डाटा भी रिकार्ड कर सकेगा। उत्तराखंड मौसम केंद्र के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि सुरकंडा मंदिर के निकट रडार निर्माण क्षेत्र में बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं को जुटाया जा रहा है। उसके बाद रडार लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या है डॉप्लर रडार
डॉप्लर वेदर रडार मौसम की अतिसूक्ष्म तरंगों को भी कैच कर लेता है। जब अतिसूक्ष्म तरंगें किसी भी वस्तु से टकराकर लौटती हैं, तो यह रडार उनकी दिशा को आसानी से पहचान लेता है। ये रडार तरंगों को भांपकर मौसम संबंधी भविष्यवाणी करता है। इस रडार के जरिए 100 किमी तक की मौसम गतिविधियों की जानकारी मिल सकती है।