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गंगा के उद्गम स्थल से इलाहबाद तक पाई जाती है 594 प्रजातियां

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जंतु विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के अंतिम दिन गंगा नदी के रखरखाव और उसकी निरंतरता पर विचार विमर्श किया गया।
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जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता पर आयोजित सेमिनार के अंतिम सत्र में इलाहाबाद विवि के प्रो. संदीप कुमार मल्होत्रा ने जलीय जीवों में पनपने वाले परजीवियों की विविधता और उनकी भूमिका के विषय में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। ग्राफिक एरा विवि के प्रो. आशीष थपलियाल ने कहा कि गंगा की निरंतरता के साथ-साथ उसकी जैव विविधता और विकास के मानकों में संतुलन जरूरी है। डा. विपुल मारिया ने बताया कि गंगा की जैव विविधता इतनी विशाल है कि उसके उद्गम स्थल से इलाहाबाद संगम स्थल तक स्तनधारी प्राणियों की कुल चार प्रजातियां, जलीय जीवों की 177 प्रजातियां, सरिसृपों की 27, उभयचरों की 11 और मछलियों की सबसे अधिक 375 प्रजातियां पाई जाती है। पंचम सत्र में शोध छात्रों ने 36 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। गुवाहाटी विवि के डा. जयंत कुमार दास ने सूक्ष्म जीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का शोध पत्र प्रस्तुत किया। डा. मणिकांत शाह ने बताया कि कई ऐसी सभ्यताएं हैं, जो बिना पानी विलुप्त हुई हैं और कई विलुप्ति के कगार पर हैं। इस मौके पर वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड एवं नेचर के विशेषज्ञ नितिन कौशल, प्राचार्य डा. अशोक कुमार, डा. कविता काला, डा. शालिनी रावत, डा. आशा डोभाल, डा. प्रीति शर्मा, डा. कुलदीप रावत, डा. आरती खंडूड़ी, एसडीओ वीके सिंह, प्रो. बीएस बिष्ट, डा. वंदना सेमवाल, डा. विजय प्रकाश सेमवाल आदि मौजूद थे।
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