मांग के समर्थन में 18 को जिले में करेंगे प्रदर्शन और 23 फरवरी को सचिवालय का घेराव
संवाद न्यूज एजेंसी
नई टिहरी। उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने 27 सूत्री लंबित मांगों का निराकरण न होने पर रोष जताते हुए 18 फरवरी से आरपार की लड़ाई शुरू करने की चेतावनी दी है। सरकार पर इंजीनियर्स महासंघ की उपेक्षा का आरोप लगाया।
लोनिवि अतिथि गृह परिसर में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ जिला इकाई की बैठक जिलाध्यक्ष भूपेंद्र रावत और सचिव राजेंद्र सोढ़ी की देखरेख में आयोजित की गई।
बैठक में कनिष्ठ अभियंताओं के वेतन विसंगति को ठीक करने, 1 जनवरी 2014 के बाद विभागों में नियुक्त कनिष्ठ अभियंता को प्रथम एसीपी के रूप में 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर लेवल दस का वेतनमान देने, पुरानी पेंशन बहाली, प्रोन्नति की सीमा 20 प्रतिशत करने, सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति, विभागीय अभियंताओं की ड्यूटी गैर तकनीकी कार्यों में न लगाने, सभी विभागों में कार्यरत अभियंताओं को बायोमेट्रिक हाजिरी से छूट देने की मांग की गई।
प्रांतीय संगठन सचिव सतीश भट्ट, मंडल उपाध्यक्ष विपिन डोभाल, समीक्षा डोभाल ने कहा कि सरकार को 27 सूत्री मांगों को लेकर पूर्व में कई बार अवगत कराया है, लेकिन शासन स्तर से समस्याओं के समाधान की कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
फरवरी और मार्च माह में छूटे हुए सभी निर्माण कार्य पूरा करने होते है, लेकिन शासन-प्रशासन की हटधर्मिता से इंजीनियरों को हड़ताल पर जाने को बाध्य होना पड़ रहा है। जल्द ही उक्त समस्याओं का
समाधान नहीं किया जाता है तो मांग के समर्थन में 18 फरवरी को इंजीनियर कलेक्ट्रेट में धरना देगे। 23 फरवरी को सचिवालय का घेराव किया जाएगा। आनंद पंवार, स्वाति चौहान, उषा भंडारी, अंकित सैनी, अकील आलम, विपिन सेल्टा, पंकज तिवारी, जयप्रकाश भट्ट, नितिन लेखवार आदि मौजूद रहे।