डॉक्टरों और फार्मेसिस्टों की अटैचमेंट व्यवस्था से स्वास्थ्य विभाग की सेहत खराब हो गई। जिले की लचर स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही है। जिले में कार्यरत 49 संविदा डॉक्टर पीजी करने को लंबे अवकाश पर चले गए हैं, जबकि 19 डॉक्टरों और आठ फार्मेसिस्टों ने सुविधाजनक स्थानों पर अपना अटैचमेंट करवा दिया है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में डाक्टर न होने के कारण ग्रामीणों को कोरोना संक्रमण के दौरान भी सर्दी-जुकाम, बुखार के उपचार के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
टिहरी जिले में एक जिला अस्पताल, एक संयुक्त चिकित्सालय, 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 25 अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, तीन महिला चिकित्सालय समेत कुल 282 स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें 229 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इन अस्पतालों में 140 स्थायी डॉक्टर और 66 संविदा चिकित्सक तैनात थे, लेकिन इस शैक्षिक सत्र में 49 डॉक्टर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पीजी (पोस्ट ग्रेजुएट) करने चले गए हैं, जबकि ऊंची पहुंच रखने वाले 19 डॉक्टरों ने सुविधाजनक स्थानों पर अटैचमेंट करवा रखा है। अटैचमेंट करवाने में पैरामेडिकल स्टॉफ भी पीछे नहीं है। आठ फार्मेसिस्टों, चार उपचारिका, दो वरिष्ठ सहायक, एक कनिष्ठ सहायक, एक-एक एएनएम, दृष्टिमितिज्ञ ने भी मनमाफिक स्थान पर अटैचमेंट करवा दिया है।
कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर अन्य जरूरी पदों के रिक्त होने के कारण काम चलाओ व्यवस्था के लिए कुछ डॉक्टरों को अटैचमेंट किया गया है। जिलास्तर से किए गए अटैचमेंट को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा। 49 डॉक्टर शासन से अनुमति लेकर पीजी करने गए हैं।
-डा. सुमन आर्य, सीएमओ टिहरी।
डॉक्टर, फार्मेसिस्ट समेत अन्य पदों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल पदों पर भेजा जाना चाहिए, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो सके। सरकार की प्राथमिकता भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने की है। अटैचमेंट समाप्त करने के लिए शासन से वार्ता की जाएगी।
डा. धन सिंह नेगी, विधायक टिहरी।