पुनर्वास की मांग को लेकर 16 अक्तूबर से आंदोलनरत रौलाकोट के ग्रामीणों का आक्रोश वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत को झेलना पड़ा। ग्रामीणों ने डोबरा-चांठी पुल के ऊपर जा रहे वन मंत्री का काफिला रोककर उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई। मंत्री के काफिले को पुल से नहीं जाने दिया, जिसके चलते मंत्री पुल से लौटकर स्यांसू-भैंगा पुल से सेम मुखेम के लिए रवाना हुए। ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। टिहरी झील से हो रहे भूस्खलन के कारण उनके आवासीय भवन जर्जर हो चुके हैं।
रविवार को वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत सेम मुखेम स्थित नागराजा के मंदिर में पूजा अर्चना को जा रहे थे। मंत्री नवनिर्मित डोबरा-चांठी पुल से गुजर रहे थे। पुल के ऊपर मंत्री के गुजरने की सूचना मिलते ही चांठी के समीप 16 अक्तूबर से धरना दे रहे रौलकोट के बांध प्रभावित पुल पर पहुंच गए। उन्होंने मंत्री का काफिला रोककर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे एसडीएम पीआर चौहान ने आक्रोशित ग्रामीणों से वार्ता की। बावजूद प्रभावित नहीं माने, इतने में मंत्री भी ग्रामीणों के बीच पहुंच गए। ग्रामीणों ने मंत्री का घेराव कर समस्याएं बताई। कहा कि टिहरी बांध की झील बनने के कारण उनके भवन और भूमि भूधंसाव की चपेट में आ गई है। सरकार ने वर्ष 2010-11 में रौलाकोट गांव का भू-गर्भीय सर्वे करवाया था, जिसमें गांव को पुनर्वास के लिए पात्र पाया था। लेकिन वर्षों बाद भी भूमि उपलब्ध न करवाए जाने के कारण पुनर्वास नहीं हुआ।
मंत्री ने ग्रामीणों को समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिया, लेकिन आक्रोशित ग्रामीण नहीं माने। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक भी हुई। इस मौके पर प्रधान आशीष डंगवाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य गीता देवी, सागर भंडारी, गगन बिष्ट, मनीषा पंवार, हीरालाल, अजय बिष्ट, सचिन डंगवाल, धनपाल सिंह, धर्म सिंह, गोकल बिष्ट, बलवंत धनाई, दीपक डंगवाल, धीरज धनाई, कलम सिंह, अनिल थपलियाल, एतवारी देवी, भंगैड़ी देवी, बसंता देवी, नारायणी देवी, सौंला देवी, प्यारा देवी, गीता देवी आदि मौजूद थे।