कंडीसौड़ के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कौशल में नहीं पानी।
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पानी के अभाव में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कौशल की छात्राएं पलायन करने को मजबूर हैं। छात्राओं को आवासीय सुविधा के लिए चार करोड़ का छात्रावास तो बनाया गया है, लेकिन कौशल गांव के लोगों ने प्राकृतिक स्रोत से पानी देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में विभाग के लिए छात्रावास तक पानी पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।
गरीब मेधावी छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से वर्ष 2007 में थौलधार विकास खंड के कौशल में कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास की स्थापना की गई थी। तब विद्यालय में 50 छात्राएं अध्ययनरत थीं, लेकिन अब छात्राओं की संख्या घटकर 38 पहुंच गई है। सात वर्षों तक यह विद्यालय पंचायत भवन पर संचालित होता रहा।
वर्ष 2014-15 में 150 छात्राओं के लिए तीन करोड़ 85 लाख से दो छात्रावास भवनों का निर्माण हो चुका है, लेकिन पानी के अभाव में छात्रावास की व्यवस्था दम तोड़ रही है। क्योंकि कौशल गांव के लोगों ने छात्रावास के लिए प्राकृतिक स्रोत से पानी की आपूर्ति करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रधान अरविंद भंडारी का कहना है कि स्रोत पर पानी कम होने के चलते 150 परिवारों के लिए पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
छात्रावास में पानी की आपूर्ति करने के लिए छात्रावास से 300 मीटर दूरी पर हैंडपंप लगाया गया है, लेकिन हैंडपंप का पानी छात्रावास में निवासरत छात्राओं को ऊंट के मुंह में जीरा जैसा साबित हो रहा है। खड़ी चढ़ाई पार कर छात्रावास तक पानी ढोना छात्राओं के लिए मुसीबत बना हुआ है। पानी के अभाव में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं दूसरे विद्यालय में पलायन कर रही हैं।
कोट
छात्रावास में पानी की कमी के चलते दिक्कतें आ रही है। छात्रावास में पानी की नई पाइप लाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
-केएस असवाल, प्रधानाचार्य कस्तूरबा गांधी विद्यालय कौशल