प्रतापनगर के गरवाण गांव इंटर कॉलेज में छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर है। स्थिति यह है कि बारिश होते ही स्कूल की भी छुट्टी हो जाती है। यह स्थिति पिछले चार साल से स्कूल के अधूरे भवन निर्माण के लिए बजट नहीं मिलने से बनी हुई है।
प्रतापनगर के दूरस्थ गरवाण गांव इंटर कॉलेज के नए भवन निर्माण के लिए 2015 में एक करोड़ 12 लाख की स्वीकृति मिली थी। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम चंबा 58 लाख की प्रथम किश्त मिलने पर 2016 में कार्य शुरू किया था। छह माह के अंतर्गत कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। नए भवन निर्माण के लिए जीर्णशीर्ण हो चुके पुराने भवनों का ध्वस्तीकरण किया गया। तब छात्र-छात्राओं को उम्मीद जगी थी अब जल्द ही उन्हें नए सुविधायुक्त कक्ष-कक्षों में पढ़ने का मौका मिलेगा। स्कूल भवन निर्माण के नाम पर 58 लाख की धनराशि से केवल दो मंजिला भवन के कॉलम बिम और छत ही पड़ी है। दूसरी किश्त 54 लाख की धनराशि चार साल बाद भी जारी नहीं हो पाई, जिससे भवन निर्माण अधर में लटका है। डीईओ माध्यमिक एसपी सेमवाल का कहना है कि अधूरे स्कूल भवनों के निर्माण को लेकर आज ही नाबार्ड की बैठक हुई है। गरवाण गांव स्कूल भवन निर्माण के लिए पूरी धनराशि न मिलने का मुद्दा नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक के सम्मुख रखा गया है।