जिले के 613 बस्तियों के लिए 19 पंपिंग पेयजल योजनाएं वर्षों से बनाई जा रही है। इन पर अब तक करीब दो अरब 47 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च हो चुकी है। बावजूद ग्रामीणों के हलक अभी भी सूखे हैं। वर्तमान में केवल तीन योजनाओं का निर्माण ही पूरा हो पाया है।
वर्ष 2006-14 के बीच जिले में 19 पंपिंग पेयजल योजनाएं स्वीकृत हुई थी। योजनाओं से 613 बस्तियां पूर्ण, 365 आंशिक और 212 बस्तियां आंशिक रूप से जुड़ी थी। निर्माण एक-दो साल में पूरा होना था। प्रतापनगर, रजाखेत, साज्यूला और कोशियारताल पंपिंग योजना के लिए स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष पूरा बजट खर्च हो चुका है।
अब विभाग योजनाओं के निर्माण के लिए शासन से करीब 60 करोड़ की धनराशि की मांग की है। धनराशि नहीं मिलने से अभी तक योजनाओं का कार्य अधर में लटका हुआ है। हालांकि विभाग का दावा है कि तीन से पांच माह के अंदर आधा दर्जन पंपिंग योजनाओं पर पानी शुरू किया जाएगा। बावजूद विभागीय लापरवाही और समय पर यदि बजट नहीं मिला, तो पंपिंग योजनाओं का कार्य पूर्ण होना संभव नहीं होगा।
योजनाओं पर खर्च धनराशि
वर्तमान में कोटेश्वर झंडीधार में नौ करोड़ 70 लाख, क्वीली पालकोट 16 करोड़ 55 लाख, सूरजकुंड रानीताल 10 करोड़ 21 लाख, प्रतापनगर 13 करोड़ 32 लाख, रजाखेत नौ करोड़ 35 लाख, लालूर 11 करोड़ आठ लाख, घंटाकर्ण 21 करोड़ आठ लाख, कोटेश्वर सिल्काखाल तीन करोड़ 27 लाख, हेंवलघाटी 20 करोड़ 96 लाख, सूरजकुंड रानीताल फेज-2 पर 19 करोड़ 38 लाख, सजवाण कांडा चार करोड़ 50 लाख, कोटेश्वर झंडीधार (पौड़ीखाल क्षेत्र) फेज-2 नौ करोड़ 87 लाख, कोटेश्वर झंडीधार (पंचूर क्षेत्र) चार करोड़ 36 लाख, क्वीली पालकोट फेज-2 आठ करोड़ 91 लाख, सारज्यूला 20 करोड़ 12 लाख, कोशियार ताल 21 करोड़ 87 लाख, लक्ष्मोली हड़ीम की धार 19 करोड़ 46 लाख, कोटेश्वर झंडीधार (चुन्नीखाल क्षेत्र)और नरेंद्रनगर पुनर्गठन पंपिंग पर 15 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कोटेश्वर झंडीधार, क्वीली पालकोट, सूरजकुंड पंपिंग योजना को छोड़कर किसी का भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
तीन योजनाओं का निर्माण पूरा शुरू हो चुका है, जिनमें पानी शुरू हो गया है। आधा दर्जन योजनाओं का कार्य अंतिम चरण में हैं। जल्द ही आधा दर्जन योजनाओं का कार्य को पूर्ण कर पेयजल आपूर्ति नियमित की जाएगी।
-बीसी पुरोहित, एसई, जल निगम।