केंद्र सरकार की नोटबंदी के फैसले ने साधन सहकारी समितियों और मिनी बैंकों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला सहकारी बैंक ने अब समितियों और मिनी बैंक को केवल एक खाताधारक के रूप में मानकर सप्ताह में केवल 24 हजार कैश ही दे रहा है, जिससे समिति एवं मिनी बैंकों से जुड़े ग्राहक और अधिकारी-कर्मचारियों को दिक्कतें हो रही है।
केंद्र सरकार ने पांच सौ एवं एक हजार नोटबंदी के बाद सहकारी समितियों और मिनी बैंकों को बैंक मनाने से इनकार कर लेनदेन पर 11 नवंबर से पूरी तरह रोक लगा दी है। जिले में 88 सहकारी समितियां, 115 मिनी बैंक संचालित है।
वर्तमान में दो करोड़ से अधिक की धनराशि डीसीबी में डिपोजिट है। पहले डीसीबी की शाखाओं की भांति समितियों और मिनी बैंक को कैश दिया जाता था, लेकिन नोटबंदी के चलते डीसीबी में समितियों और मिनी बैंकों को केवल एक खाता धारक के रूप में 24 हजार ही सप्ताह में कैश दे रहा है। जिससे समितियों एवं मिनी बैंक के खाताधारकों के सामने जमा पैसे को निकलने की ही समस्या पैदा हो चुकी है।
नए नियम के अनुसार आरबीआई ने मिनी बैंक एवं सहकारी समितियों को केवल ग्रामीण बचत केंद्र के रूप में माना है, जिसके चलते समितियां एवं मिनी बैंकों को केवल एक खाताधारक के रूप में कैश दिया जा रहा है।
- वंदना श्रीवास्तव, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक।
समितियों एवं मिनी बैंकों के ग्राहक लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन डीसीबी से केवल सप्ताहभर में 2400 कैश ही मिल रहा है। समस्या का निराकरण नहीं होने पर साधन सहकारी समिति सचिव परिषद को मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।
-हर्षमणी नौटियाल, जिलाध्यक्ष, साधन समिति सचिव परिषद।