जिला सहकारी बैंक और महिला समूह के बीच ऋण को लेकर उपजे विवाद की जांच में महिलाओं को दोषी ठहराया गया है। एसडीएम ने मामले की जांच करने के बाद कहा कि ऋण के लिए एक-दूसरे का गारंटर बनना और खाता खोलने के बाद उन्होंने संचालन नहीं किया है, तो गलती ऋण लेने वालों की है। उन्होंने महिलाओं को मय ब्याज धनराशि बैंक में जमा करने को कहा है।
कंडी की महिला समूह ने लघु उद्यम लगाने के लिए जिला सहकारी बैंक से 30 मार्च 2012 को चार लाख रुपये का ऋण लिया था, जिसमें वह एक-दूसरे की गारंटर बनी और खाता भी खोला था। बैंक ने ऋण स्वीकृत कर हर खाते में 25 से 30 हजार रुपये की राशि जमा कराई, लेकिन इस बीच महिलाओं ने खाते का संचालन नहीं किया। तीन साल बाद जब महिलाओं को बैंक से वसूली का नोटिस भेजा गया, तो उन्होंने रोष जताते हुए बैंक पर ही जानकारी नहीं देने का आरोप लगाते हुए ब्याज जमा कराने से इनकार कर दिया था। मामले की जांच कर रहे एसडीएम कृष्ण कुमार मिश्रा ने बृहस्पतिवार को बताया कि महिलाएं एक-दूसरे की गारंटर बनी हैं। उन्होंने खाते भी खोले, उसका संचालन नहीं करना उनकी स्वयं की गलती है। उन्होंने कहा कि सभी खाताधारकों को मय ब्याज राशि जमा करानी होगी। इस बाबत समूह की विमला देवी, सुंदरी देवी, वासु देवी, अनीता देवी, इलमा देवी, परिभाषा देवी और शकुंतला देवी ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो उन्हें उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।