प्रतापनगर को जोड़ने के लिए बन रहे चांठी-डोबरा पुल के निर्माण में तेजी आनी शुरू हो गई है। मुख्य पुल तक पहुंचने के लिए वैली ब्रिज का निर्माण चार माह के अंदर पूरा हो जाएगा, जबकि डोबरा साइड से बने मुख्य पुल के दोनों टावरों की आठ-आठ मीटर की प्लेटें लगा दी है।
जल्द ही पुल को जोड़ने के लिए दोनों साइड से कैटवॉक बनाने का काम शुरू हो जाएगा। साथ ही पुल तक पहुंचने के लिए लोनिवि ने एप्रोच मार्ग भी बना दिया है।
चांठी-डोबरा पुल की फाइनल डिजायन नहीं मिलने के कारण पांच साल से पुल का निर्माण अधूरा पड़ा था। निवर्तमान सरकार ने पुल की डिजायन कोरियाई कंसलटेंस से तैयार करवाकर 12 फरवरी से पुल का निर्माण शुरू हो गया है।
पहले चरण में मुख्य पुल तक पहुंचने के लिए चांठी साइड से 25 मीटर स्पान का वैली एप्रोच पुल का निर्माण किया जा रहा है। वर्तमान में वैली ब्रिज के एप्रोज की दोनों साइड एबेटमेंट का कार्य अंतिम चरण में है।
करीब चार माह के अंदर पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा, जबकि एक मई से कार्यदायी संस्था मुख्य पुल को जोड़ने के लिए कैटवॉक का काम शुरू करेगा, जबकि पुल को दोनों साइड से जोड़ने के लिए पूर्व की कार्यदायी संस्था की ओर से लगाई गई प्लेटों को बदलकर आठ-आठ मीटर की नई प्लेटें लगा दी है।
लोनिवि ने डोबरा साइड से डेढ़ किमी सड़क का निर्माण पूरा कर दिया है, जिससे निर्माण सामग्री आसानी से साइड पर पहुंच रही है। ज्ञात हो वर्ष 2006 से शुरू हुए पुल के निर्माण पर एक अरब 32 करोड़ खर्च होने पर भी पुल निर्माण अधूरा पड़ा था। अब सरकार ने पुल के लिए एक अरब 35 करोड़ रुपये और स्वीकृत किए हैं।