रोजगार के लिए पहाड़ से पलायन कर रहे युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की मुहिम रंग लाने लगी है। धीरे-धीरे ही सही युवा वर्ग शहरों की खाक छानने के बजाए सूक्ष्म और मध्यम लघु उद्यम लगाकर स्वरोजगार की तरफ बढ़ रहे हैं। अपने उद्यम से जहां वह अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, वहीं ओर लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।
नौकरी की तलाश में युवा वर्ग के शहरों की तरफ जाने से बढ़ रही पलायन की समस्या से चिंतित सरकार कई जागरूकता अभियान चलाकर स्वरोजगार शुरू करने के लिए कई तरह का प्रोत्साहन भी दे रही है। मेट्रो सिटी में नौकरी कर रहे ग्रेज्युएट विनीत डोभाल और बीटेक विकास डोभाल ने शहरों में भाग-दौड़ करने के बजाए अपना स्वरोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। दोनों भाइयों ने नई टिहरी में कैरी बैग (कपड़े का थैला) बनाने का लघु उद्यम शुरू किया। दो माह में ही इसके बेहतर परिणाम आने लगे। वह आठ लोगों को रोजगार देकर करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह अर्जित कर रहे हैं। इसी तरह चाह गडोलिया की नव निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्य गुलाबी देवी रावत भी अपने घर में दोना-पत्तल का सूक्ष्म उद्यम लगाकर अपने घरेलू काम से समय निकालकर अभी पांच हजार रुपये अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। चाह गडोलिया के ही प्रताप सिंह राणा सहकारी समिति में काम करते हैं, अपनी नौकरी से समय निकालकर घर में ही कपड़े धोने का साबुन बनाने का लघु उद्यम शुरू किया है, जिससे दो माह में ही उनकी आय चार-पांच हजार पहुंच गई है। स्वाड़ी गांव की स्नातक सीमा कुमाईं ने भी नई टिहरी में स्लीपर मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू किया है, जिससे वह दो और लोगों को भी रोजगार दे रही हैं। सीमांत गांव मरवाड़ी के रमेश बिष्ट भी नूडल्स बनाकर मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे वह घर बैठे करीब 20 हजार रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
सूक्ष्म और मध्यम लघु उद्यम लगाकर स्वरोजगार करने वालों को सरकार कई तरह की मदद दे रही है। नया लघु उद्यम लगाने पर बिजली में शतप्रतिशत छूट और परिवहन उपादान भी दिया जा रहा है। ऋण पर 35 प्रतिशत सब्सिडी और जीएसटी में छूट दी जा रही है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन में भी 25 से 35 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है।
-महेश प्रकाश, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र टिहरी।