टाडा की बोट रेस्क्यू कार्याें के लिए सुरक्षित रखने की मांग
नई टिहरी। श्री गंगा भागीरथी बोट यूनियन ने टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) पर वर्षों से खराब पड़ी अपनी चार बोटों का संचालन करने के लिए निविदा जारी करने पर सवाल उठाए हैं। यूनियन ने आरोप लगाया कि टाडा की इस कार्रवाई से कोटीकाॅलोनी क्षेत्र में पहले से स्वरोजगार से जुड़े युवाओं की आजीविका प्रभावित होगी।
कोटीकाॅलोनी में पत्रकार वार्ता करते हुए यूनियन के अध्यक्ष वीरेंद्र नेगी और कार्यकारी अध्यक्ष लखवीर चौहान ने कहा कि टिहरी झील की क्षमता सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है। वर्तमान में कोटीकॉलोनी में 110 बोट, तीन पैरासेलिंग, एक क्रूज, चार फ्लाइबोर्ड और फ्लोटिंग हट्स संचालित हो रही हैं। ऐसे में नई बोटों के संचालन से सुरक्षा और संतुलन दोनों पर संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि टाडा की ओर से सालों से खराब पड़ी चार बोटों के संचालन के लिए निविदा जारी करना युवाओं के स्वरोजगार पर कुठाराघात है। यूनियन मामले में अपनी आपत्ति डीएम और टाडा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नितिका खंडेलवाल को बता चुका है। डीएम ने मामले में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यूनियन पदाधिकारियों ने सुझाव दिया कि टाडा को इन चारों बोटों को झील के बोट प्वाइंट कोटी, डोबरा, नंदगांव और सांदणा रेस्क्यू बोट के रूप में उपयोग लाना चाहिए। क्योंकि झील क्षेत्र में रेस्क्यू कार्यों के लिए कोई बोट की व्यवस्था नहीं है। अनुज उनियाल ने बताया कि डोबरा, नंदगांव और सांदणा में कुल 23 बोट लाइसेंस जारी किए गए हैं लेकिन बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से पर्यटक वहां नहीं जा रहे हैं। यदि प्रशासन नए बोट प्वाइंटों पर आवश्यक सुविधाएं बढ़ाए तो पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।
यूनियन ने प्रतापनगर साइट में खाली पड़ी भूमि पर प्रशासन से बंजी जंपिंग, टेंट कॉलोनी और होम स्टे को प्रोत्साहन देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि झील के आसपास की खाली जमीनों को युवाओं को लीज पर दी जाए। इस मौके पर प्रवीन रावत, भूपेंद्र राणा, प्रमोद शाह, मनीष रावत, सचिन अग्निहोत्री, संदीप रावत, मदन रावत, दीपक रावत, गब्बर पंवार, नवीन नेगी, विपिन कठैत, जयवीर कृषाली, पवनदीप पंवार उपस्थित रहे।