बांध प्रभावित क्षेत्र प्रतापनगर, जाखणीधार और थौलधार के लोगों के आवागमन को झील में संचालित बोटों का संचालन नए साल से बंद हो गया है। बोट मालिकों ने लंबे समय से भुगतान न होने के चलते 31 दिसंबर शाम से बोटों का संचालन ठप कर दिया है।
झील में पुनर्वास निदेशालय ने वर्ष 2005 में झील बनने के कारण बांध प्रभावितों को आरपार जाने के लिए कांट्रेक्ट पर नौताड़, गडोलिया, नकोट, डोबरा, रौलाकोट, छाम, सारपुल, म्यूड़ा आदि स्थानों पर बोट संचालित कर रहा है। प्रत्येक वर्ष अनुबंध के आधार पर निजी बोटें ली जाती है। बोटों को संचालित करने को टीएचडीसी पुनर्वास निदेशालय को बजट देता रहा है, लेकिन इस वित्तीय वर्ष में अभी तक बोट संचालन को टीएचडीसी ने बजट नहीं दिया है। बजट नहीं मिलने के कारण अप्रैल 2019 से बोट मालिकों को भुगतान नहीं कर पाया। भुगतान न होने से मालिकों ने 31 दिसंबर शाम से बोटों का संचालन बंद कर दिया है। बोटों पर प्रत्येक दिन सैकड़ों प्रभावित आरपार जाते थे, लेकिन अब प्रभावितों की मुश्किल बढ़ने शुरू हो गई। दूसरे दिन भी प्रभावित बोट सेवा के लिए भटकते रहे। लोगों ने 60-70 किमी का अतिरिक्त सफर तय अपने गंतव्य तक पहुंचे। प्रतापनगर के कंगसाली क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य नीलम बिष्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष, पुनर्वास निदेशक को ज्ञापन देकर बोट सेवा फिर से शुरू करने की मांग की। अवस्थापना खंड पुनर्वास के एई राकेश निराला का कहना है कि बोट संचालन को टीएचडीसी ने इस वित्तीय वर्ष कोई भी बजट नहीं दिया है। टीएचडीसी की ओर से बजट मिलने पर ही बोटों का संचालन हो पाएगा।