ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने को हैं मजबूर
आठ वर्षों से डामरीकरण की राह ताक रही घरगांव-चौड़खेत सड़क
नई टिहरी। निर्माण के आठ साल बाद भी घरगांव-चौड़खेत सड़क का डामरीकरण नहीं हो पाया है। सड़क के बीचों- बीच कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं। ऐसे में लोगों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
डांडाचली के समीप से घरगांव होते हुए चौड़खेत के लिए जाने वाली 2़़ 5 किमी सड़क का निर्माण 2016 में किया गया था। आठ साल बाद भी सड़क का डामरीकरण नहीं होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दुवाकोटी की प्रशासक राखी चौहान, कुसुम चौहान, वीरेंद्र सिंह पुंडीर, कमल सिंह चौहान ने बताया कि जिला योजना से घरगांव से चौड़खेत तक सड़क का निर्माण हुआ था। तब से एक बार भी सड़क पर डामर नहीं बिछाया गया। जगह-जगह गड्ढे बनने से वाहनों का संचालन भी मुश्किल से हो पा रहा है।
बरसात में सड़क की स्थिति बहुत ही खराब हो जाती है। सड़क पर मिट्टी-पत्थर आने के साथ बड़े-बड़े गड्ढे हो जाते हैं, जिससे वाहन दुर्घटना का भय बना रहता है। लोनिवि नरेंद्रनगर हर वर्ष जेसीबी की मद्द से गड्ढों में मिट्टी भर कर इतिश्री कर दी जाती है। कुछ समय बाद सड़क की स्थिति फिर से बदहाल हो जाती है।
घरगांव-चौड़खेत सड़क जिला योजना से बनी है। स्थानीय विधायक की ओर से सड़क का डामरीकरण का प्रस्ताव मिलने पर उसे शासन को भेजा जाएगा। विधायक का प्रस्ताव मिलने पर ही शासन डामरीकरण के लिए बजट जारी करता है।
-विजय कुमार मोगा, अधिशासी अभियंता, लोनिवि नरेंद्रनगर।