जिले के नौ ब्लाकों में संचालित हो रहे 1982 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 1771 केंद्र वर्षों से भवन विहीन है। केवल 211 केंद्रों के पास ही अपने भवन है, जिसके चलते केंद्र पंचायत घर, बारात घर से लेकर अन्य अस्थाई भवनों पर चल रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के अपने भवन न होने के कारण बच्चों को परेशानी उठानी पड़ रही है। करीब दो साल पहले प्रशासन ने मनरेगा से भी करीब 200 केंद्रों के भवन बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन भवन निर्माण को निशुल्क भूमि न मिलने के कारण सिर्फ 38 केंद्र ही मनरेगा से बन पाए हैं।
जिले के केवल 211 केंद्रों के पास ही भवन हैं। बाकी केंद्र अस्थायी व्यवस्था पर चल रहे हैं। प्रशासन ने केंद्रों के निर्माण में बजट की कमी को दूर करने के लिए वर्ष 2017-18 में मनरेगा के वित्तीय सहयोग से जिले में प्रशासन ने करीब दो सौ केंद्रों के निर्माण को लक्ष्य रखा था। इसके लिए ब्लाकों के माध्यम से ग्राम पंचायतों से निशुल्क भूमि उपलब्ध करवाकर भवन निर्माण को प्रस्ताव तैयार करने को कहा था, लेकिन प्रतापनगर ब्लाक ने 13, नरेंद्रनगर ने 12, जाखणीधार ने सात और भिलंगना ने छह आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन मनरेगा में करवाएं हैं। जबकि कीर्तिनगर, थत्यूड़, हिंडोलाखाल, थौलधार, चंबा ने भवन निर्माण को लेकर रुचि नहीं दिखाई। जिला विकास अधिकारी आनंद सिंह भाकुनी का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण बाल विकास और मनरेगा से किया जा सकते हैं। इसके लिए पांच लाख मनरेगा और दो लाख बाल विकास विभाग से दिए जाते हैं। साथ ही अनुसूचित बाहुल्य गांव में भी भवन निर्माण को पर्याप्त बजट है, लेकिन भवन निर्माण को निशुल्क भूमि उपलब्ध करानी होगी।