कलक्ट्रेट के नाजिर की ओर से तीन लाख 33 हजार रुपये के गबन के मामले का महालेखाकार ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
महालेखाकार की टीम ने 12 मई को जिला कार्यालय में संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर जिला प्रशासन से जवाब मांगा है।
जिलाधिकारी कार्यालय में वर्ष 2011 में तत्कालीन नाजिर रामलाल खत्री पर आरोप है कि उसने सरकारी खजाने से तीन लाख 33 हजार रुपये की धनराशि निकाली और अपने निजी उपयोग में खर्च कर डाली।
उसके बाद समय-समय पर नाजिर ने उक्त धनराशि को सरकारी खजाने में जमा करा दिया। मामले का पता चलने पर डीएम युगल किशोर पंत ने पिछले साल इस मामले की जांच के आदेश जारी किए थे।
जिसके बाद वरिष्ठ कोषाधिकारी की अध्यक्षता में जांच की गई और रामलाल खत्री को सरकारी धन के दुरुपयोग का दोषी पाया गया। महालेखाकार ने गबन का संज्ञान लेते हुए 12 मई को देहरादून से टीम भेजी।
टीम ने गबन संबंधी दस्तावेजों की जांच पड़ताल कर दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई न होने पर जिला प्रशासन से तीन सवाल पूछे हैं।
ऑडिट टीम ने पूछा कि इतना समय बीत जाने के बाद भी आरोपी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या राम लाल और राम लाल खत्री एक ही व्यक्ति है इस संबंध में भी जिला प्रशासन से स्पष्ट जवाब तलब किया है।
इस संबंध में डीएम युगल किशोर पंत ने कहा, ऑडिट टीम ने निरीक्षण किया है। एडीएम को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा गया था। उनसे पूछा जाएगा कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।