लॉकडाउन के बाद से रोजगार प्रभावित होने पर एक ढोल वादक ने रोजगार का नया जरिया ढूंढा है। पुरसोल गांव निवासी रामू दास ने भैला बेचकर भैला परंपरा के संरक्षण को संजोने की नई पहल की है। नगर क्षेत्र में पहली बार भैले की दुकान देखकर लोग काफी खुश हुए और हाथों हाथ भैले खरीदे। इससे जहां लोगों के नगर में ही आसानी से भैले मिले गए, वहीं रामू की भी अच्छी कमाई हो गई।
लॉकडाउन के बाद से शादी-विवाह कार्यक्रम कम होने से ढोल वादकों की आजीविका भी प्रभावित हुई है। रोजगार के कोई साधन न होने पर पुरसोल गांव के रामू दास ने इस दिवाली में प्राचीन भैला संस्कृति संरक्षण से जेब खर्च निकालने की तरकीब ढूंढी है। रामू ने सूखी लकड़ियों से भैला तैयार किए और उन्हें नगर क्षेत्र में घूम-घूम कर बेचने लगा। नगर क्षेत्र में निवास कर रहे लोग भैलों को हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। रामू ने बताया कि लॉकडाउन में ढोल वादन का काम भी प्रभावित हुआ है। इस दिवाली में पॉकेट मनी निकालने के लिए यह तरीका ढूंढ जिसे लोग खूब पसंद कर खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो छोटे और बड़े भैलों की कीमत 100 से 150 रुपये रखी गई है। इन दो दिन में वह अभी तक 50 से अधिक भैले बेच चुके हैं। व्यापार सभा के अध्यक्ष दर्मियान सिंह सजवाण ने कहा कि पॉकेट मनी निकालने के लिए रामू का यह सराहनीय प्रयास है।