कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए 2012 में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कंडीसौड़ तो बना दिया गया लेकिन 14 साल बाद भी अस्पताल में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं।
थौलधार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत वर्ष 1957 में छाम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से हुई थी। वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील में छाम बाजार डूबने के बाद 2006 में कंडीसौड़ में 20 नाली भूमि पर अस्पताल का निर्माण कराया गया। वर्ष 2012 में इसका उच्चीकरण कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया। अस्पताल परिसर के विस्तार के साथ डॉक्टरों के आवास के लिए करोड़ों रुपये की लागत से भवन भी तैयार किए गए, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार नहीं हो पाया।
सीएचसी में डॉक्टरों के 10 पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में 7 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सीधा असर अस्पताल की ओपीडी पर भी दिखाई दे रहा है। यहां रोजाना ओपीडी 45 से 50 मरीजों के आसपास ही सीमित रहती है। वर्ष 2022 में विधायक निधि से दंत चिकित्सा के लिए लाखों रुपये की डेंटल चेयर और अन्य उपकरण खरीदे गए थे। दंत रोग डॉक्टर नहीं होने के कारण इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। वहीं खनिज न्यास फाउंडेशन से वर्ष 2024-25 में लाखों रुपये की लागत से एक्सरे मशीन स्थापित की गई।
जिला पंचायत सदस्य सुनील जुयाल, जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जयवीर सिंह रावत, प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष युद्धवीर सिंह रावत का कहना है कि सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए करीब 70 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल बौराड़ी या उत्तरकाशी जाना पड़ता है।
डॉक्टरों के रिक्त पदों पर तैनाती के लिए हर महीने शासन को रिपोर्ट भेजी जाती है। क्षेत्र में स्त्री रोग और बाल रोग विशेषज्ञ की सबसे अधिक आवश्यकता है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लोगों को समय-समय पर लाभ दिया जाता है।
डॉ. मयंक रमोला, प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक सीएचसी कंडीसौड़