चंबा (टिहरी)। गढ़वाल केंद्रीय विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में भू-विज्ञान विभाग की पहल पर मंगलवार से भू-पर्यावरणीय आपदाएं और नव निवर्तनिकी विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई।
कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट ने किया। उन्होंने कहा कि हिमालय में कुदरत के बढ़ते कहर के लिए मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं। आपदाओं को न्यूनीकरण करने के लिए सावधानियां बरतने के साथ ही सूचना तंत्र स्थानीय, हिमालयी, एशियाई तथा वैश्विक स्तर पर बनाए जाने की जरूरत है। समय रहते इन बातों को अमल पर नहीं किया गया, तो भयंकर त्रासदी को नकारा नहीं जा सकता है। कहा कि बांधों और सड़कों के निर्माण के लिए पहाड़ के सीने में छेद कर बारूद डाला जा रहा है। नदी के प्रवाह क्षेत्र में घुसपैठ तथा अनियंत्रित शहरीकरण किया जा रहा है। सीबीआरआई (सेंटर बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) रुड़की के पूर्व निदेशक आरके भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड की जलप्रलय एक चेतावनी है। आपदा की रोकथाम के लिए रणनीति बनाई जानी चाहिए। डा. एसपी सती ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण प्रकृति में कई तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। इस मौके पर परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला, डा. एनपी नैथानी, प्रो. एनके अग्रवाल, प्रो. आर नागराजन, प्रो. एचसी नैनवाल, प्रो. डीएस कैंतुर, डा. केसी पेटवाल, डा. केके बंगवाल आदि मौजूद थे।