नई टिहरी। मनरेगा की योजनाओं को विभागीय अधिकारी कैसे ठेगा दिखा रहे है इसका नमूना भिलंगना प्रखंड के ग्राम पंचायत सरुणा में देखने को मिल रहा है। मनरेगा लोकपाल ने ग्राम प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी द्वारा फर्जी तरीके से हड़पी गई 20 हजार 305 रुपये 15 दिन में मनरेगा के खाते में जमा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन तय तिथि बीतने के बाद भी मनरेगा लोकपाल के आदेशों का पालन नहीं हुआ है।
ग्राम पंचायत सरुणा के राकेश सेमवाल ने मनरेगा लोकपाल को शिकायत दर्ज की थी कि 2009-10 में मनरेगा योजना में फर्जी मस्टररोल और बिल बाउचर से अनियमिताएं बरती गई है। 27 सितंबर को प्रधान ने मनरेगा लोकपाल के समक्ष अपना पक्ष रखा। गांव की एक महिला दीपा देवी जो कई वर्षों से अपने पति के साथ गुजरात में रहती है उसके नाम से कई मस्टररोल बनाकर उसे 9 हजार 520 रुपये का भुगतान करना दिखाया गया है। सिंचाई गूल और चैक डैम निर्माण के लिए वायरक्रेट खरीद में भी 10 हजार 785 रुपये की अनियमिताएं पाई गई है। मनरेगा लोकपाल पीएस नेगी ने 14 अक्तूबर को मामले की सुनवाई करते हुए फर्जीवाड़े के लिए प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी को दोषी बताया है। दोनों को 15 दिन में 20 हजार 305 रुपये मनरेगा के खाते में जमा करने के निर्देश दिए थे। ऐसा न करने पर खंड विकास अधिकारी और कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा को दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। लेकिन तय तिथि के बावजूद न तो पैसा जमा हुआ है और न ही एफआईआर दर्ज।
कोट-
प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी को 15 नवंबर तक पैसा जमा करने का समय दिया गया है। तय तिथि तक वे पैसा जमा नहीं करने पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। न्याय प्रकिया के तहत उन से विलंब शुल्क सहित संपूर्ण राशि जमा कराई जाएगी। -बीएस भंडारी प्रभारी खंड विकास अधिकारी भिलंगना