मोमबत्ती के सहारे गुजार रहे हैं रातें, मोबाइल बंद रिश्तेदारों से नहीं हो पा रहा संपर्क
नई टिहरी। जौनपुर ब्लॉक के कुंड, पसनी, सेरा गांव के आपदा प्रभावित लगभग 300 परिवार छह दिनों से लालटेन और मोमबत्ती के सहारे रात काटने को मजबूर हैं। तीनों गांवों की विद्युत आपूर्ति बहाल करने में ऊर्जा निगम को पसीना बहाना पड़ रहा है। 17 सितंबर को सौंग नदी के उफान पर आने पर लगभग ढाई किमी बिजली की लाइन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। स्थिति यह है कि लोगाें के मोबाइल चार्ज नहीं होने से वे अपने रिश्तेदारों से भी बातचीत नहीं कर पा रहे हैं।
जौनपुर ब्लॉक के रगड़ गांव, घुड़साल, कुंड, पसनी, सेरा गांव में अतिवृष्टि और सौंग नदी के उफान पर आने से भारी तबाही मची थी। सौंग नदी के कटाव से जगह-जगह पैदल रास्ते और पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए थे। आपदा से बिजली की लाइनों को भी काफी नुकसान पहुंचा था। अलग-अलग स्थानों पर लगभग ढाई किमी लंबी बिजली की लाइन सौंग नदी के बहाव में बह गई थी।
दर्जनों बिजली के खंभे भी टूट चुके हैं। काफी मशक्कत के बाद बीते दिन रगड़ गांव और घुड़साल गांव में ऊर्जा निगम ने बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है लेकिन कुंड, पसनी और सेरा गांव में छह दिन बाद भी बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। तीनों गांवों में लगभग 300 परिवार निवासरत हैं। छह दिनों से वे लालटेन और मोमबत्ती के सहारे रात काटने को मजबूर हैं। बिजली नहीं होने से क्षेत्र के लोगों के मोबाइल फोन शोपीस बने हैं जिससे वे अपने नाते रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
कुंड, पसनी और सेरा गांव में कल तक बिजली आपूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। सौंग नदी में लगभग ढाई किमी बिजली की लाइन बह गई है। लाइन पर मरम्मत का कार्य चल रहा है।
-अश्वनी कुमार, उप खंड अधिकारी, ऊर्जा निगम थत्यूड़