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टिपरी-मदननेगी रोपवे का संचालन बंद, बांध प्रभावितों की बढ़ी मुसीबतें

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नई टिहरी। टिहरी बांध प्रभावित प्रतापनगर क्षेत्र के लोगों की मुसीबतें एक बार फिर बढ़ गई है। झील के उस पार बसे प्रतापनगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में निवासरत लोगों के आवागमन के लिए बनी टिपरी-मनदनेगी रोपवे का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया है। लोगों को पीपलडाली मार्ग से 40 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर जिला मुख्यालय सहित अन्य स्थानों में आवाजाही करनी पड़ रही है।
वर्ष 2006-07 में भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण ने करीब एक करोड़ 50 लाख की लागत से टिपरी-मदननेगी में झील के ऊपर 984 स्पान के रोपवे का निर्माण किया था। नवंबर 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक ने रोपवे का लोकार्पण कर इसके संचालन की जिम्मेदारी ऊषा ब्रेको कंपनी को दी थी। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने रोपवे संचालन की जिम्मेदारी 26 जनवरी 2013 को सिडकुल को दी थी। सिडकुल ने रोपवे चलाने के लिए उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से अनुबंध किया था।
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एक जुलाई से सिडकुल ने रोपवे संचालन से हाथ खड़े कर दिए। सिडकुल अब किसी अन्य विभाग को इसके संचालन की जिम्मेदारी देना चाहता है। रोपवे बंद होने से बांध प्रभावित प्रतापनगर के उपली रमोली, रौणद रमोली, ओण, भदूरा, रैका, उत्तरकाशी के गाजणा और जाखणीधार के धारमंडल व ढुंगमंदार पट्टी के लगभग 200 गांवों की एक लाख आबादी को आवागमन में दिक्कत होगी। मदननेगी के प्रेमदत्त जुयाल ने बताया कि धारमंडल क्षेत्र के लिए लंबगांव से मदननेगी होते हुए ऋषिकेश पहुंचने के लिए एक मात्र बस सेवा है।
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सरकार रोपवे संचालन की जिम्मेदारी अब किसी दूसरी एजेंसी को देना चाहती है। सिडकुल भी रोपवे के संचालन में असमर्थता जता चुका है। शासनस्तर पर ही रोपवे संचालन का निर्णय होना है।
-योगेश डोभाल, प्लांट प्रभारी टिहरी मदननेगी रोपवे
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